लखनऊ, 14 जून 2026:
अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट से जुड़े कुछ नाम चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की हो रही है, जिसे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी सहयोगी माना जाता है। दूसरी तरफ जांच में करोड़ों रुपये के कथित हेरफेर के संकेत मिलने से मंदिर की दान प्रबंधन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। जांच के दौरान आठ करोड़ रुपये से अधिक के कथित हेरफेर के संकेत और कुछ साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। हालांकि अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पांच नाम जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि बरामद हुई रकम इन्हीं लोगों की निशानदेही पर मिली है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि रकम की कथित हेराफेरी में केवल यही लोग शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था।
सूत्रों का कहना है कि संदिग्धों के बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा कुछ जेवरात भी बरामद होने की जानकारी मिली है। रुदौली क्षेत्र में लवकुश के घर छापेमारी के दौरान 12 लाख की नकदी भी मिलने का भी दावा किया गया है।

टिन्नू यादव का नाम सुर्खियों में
टिन्नू यादव का मूल नाम रामशंकर यादव बताया जाता है। विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में अयोध्या में टेंपो चलाने का काम किया। बाद में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े महेश नारायण के संपर्क में आए और उनके वाहन चालक बने। महेश नारायण के निधन के बाद टिन्नू यादव चंपत राय के साथ काम करने लगे। कारसेवकपुरम में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए वह धीरे-धीरे संगठन के भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए। राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद उन्हें ट्रस्ट की ओर से कई व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई।
दान प्रबंधन में अहम भूमिका
ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुताबिक मंदिर परिसर में मानव संसाधन प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था के समन्वय और कई प्रशासनिक कामों में टिन्नू यादव सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें वॉकी-टॉकी सहित कई परिचालन जिम्मेदारियां भी दी गई थीं।
पूर्व लेखा प्रभारी ने लगाए गंभीर आरोप
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का आरोप है कि दान पेटियों से निकाली गई राशि की गिनती के बाद उसे बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी टिन्नू यादव संभालते थे। उनका कहना है कि दान में मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर भी कई सवाल हैं और उनके बैंक में जमा होने का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। हालांकि टिन्नू यादव का पक्ष है कि दान में प्राप्त नकदी और आभूषण नियमानुसार बैंक में जमा कराए जाते रहे हैं। महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में दान राशि की गिनती के दौरान उन्हें कथित अनियमितताएं दिखाई दी थीं, जिसकी शिकायत उन्होंने ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों से की थी। उनका दावा है कि बाद में उन्हें उस व्यवस्था से अलग कर दिया गया।

ट्रस्ट और पुलिस दोनों की चुप्पी बनी पहेली
मामले में अब तक ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं मिली है। इसके बावजूद सूत्रों के हवाले से जांच और रिकवरी की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही जा रही है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि यदि करोड़ों रुपये के कथित हेरफेर के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लंबे समय तक बिना किसी बड़े स्तर पर पकड़ में कैसे नहीं आया। जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य नामों और भूमिकाओं पर भी तस्वीर साफ हो सकती है।






