लखनऊ, 15 जून 2026:
यूपी की राजधानी के पॉश एरिया हजरतगंज के नरही में करीब 90 वर्षों से संचालित विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल पर कब्जे की कोशिश का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हाल ही में विद्यालय का ताला खुलने के बाद अब स्कूल के मुख्य गेट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का नोटिस चस्पा किए जाने से छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
बताया जा रहा है कि विद्यालय के गेट पर लगाया गया नोटिस 11 जून को जारी किया गया था लेकिन इसे कई दिन बाद रात के समय चस्पा किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ लोग आए और नोटिस लगाकर चले गए। नोटिस के मुताबिक विद्यालय की ओर से आज अदालत में अपना पक्ष रखा जाना था।
गौरतलब है कि गत 4 जून को हजरतगंज पुलिस ने एडीएम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विद्यालय का कब्जा विपक्षी पक्ष को सौंप दिया था जिसके बाद स्कूल पर ताला लगा दिया गया था। अचानक स्कूल बंद होने से नाराज छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक सड़क पर उतर आए थे। बेटियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विद्यालय को बचाने की गुहार लगाई थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह सिर्फ भवन या जमीन का विवाद नहीं बल्कि सैकड़ों छात्राओं के भविष्य का सवाल है।

विरोध प्रदर्शन में सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा, स्थानीय सपा नेता बद्री यादव, कांग्रेस नेता सुभाष श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए थे। कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका रश्मि ने आरोप लगाया था कि ताला लगाने के दौरान विद्यालय के महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक अभिलेखों को बोरे में भरकर खुले में रख दिया गया। इससे बारिश के कारण कई रिकॉर्ड भीग गए और अलमारियों को भी नुकसान पहुंचा।
बढ़ते जनदबाव और आपत्तियों के बाद एडीएम कोर्ट ने कथित बिल्डर द्वारा लगाए गए ताले को हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद 10 जून को विद्यालय का ताला खोला गया। उस दौरान उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा, जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा समेत कई शिक्षक नेता और स्थानीय नागरिक भी मौके पर पहुंचे थे।

हालांकि स्कूल के दरवाजे दोबारा खुल गए लेकिन भूमि और स्वामित्व को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। विद्यालय प्रबंधक संतोष रस्तोगी का दावा है कि जिस जमीन पर स्कूल संचालित हो रहा है, वह शिक्षा के उद्देश्य से दान में दी गई थी। उनका आरोप है कि भूमिदाता की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने कथित फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर संपत्ति पर दावा किया और उन्हीं दस्तावेजों के सहारे विद्यालय बंद कराने का आदेश हासिल कर लिया।
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद शिक्षक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने साफ किया है कि बेटियों के इस ऐतिहासिक विद्यालय को बचाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। कानूनी लड़ाई भी पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।






