Lucknow City

‘त्रिवेणी’ में गूंजे समृद्धि व सांस्कृतिक पुनर्जागरण के स्वर, वक्ता बोले… डिजिटल क्रिएटर्स बदल सकते हैं भारत की दिशा

महिला सशक्तिकरण, युवा शक्ति और सांस्कृतिक चेतना पर मंथन, कंटेंट क्रिएटर्स से सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाने का किया आह्वान

लखनऊ, 16 जून 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ का समापन समृद्धि, सुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के विषयों पर गहन विमर्श के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन हुए दो प्रमुख सत्रों में महिलाओं और युवाओं की भूमिका, डिजिटल क्रांति तथा भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तर प्रदेश और देश का भविष्य महिलाओं, युवाओं तथा डिजिटल माध्यमों की सकारात्मक शक्ति के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करेगा।

‘समृद्धि’ विषयक सत्र में प्रदेश के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती कानून, समानता और जनभागीदारी से आती है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय डिजिटल क्रांति का है। इसके लिए समाज को नई तकनीकों को सीखना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार नई नीतियों पर जनता की राय जानने के लिए सोशल मीडिया का भी प्रभावी उपयोग कर रही है।

वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवडेकर ने कहा कि किसी भी प्रदेश की प्रगति में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी निर्णायक होती है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं समाचार कक्षों से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। शासन-प्रशासन भी महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति पहले से अधिक संवेदनशील हुआ है।

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नागालैंड के उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने डिजिटल क्रांति को राष्ट्रीय एकता का माध्यम बताते हुए कहा कि डिजिटल मीडिया ने भौगोलिक सीमाओं को तोड़ दिया है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से सकारात्मक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर कार्य करने का आह्वान किया। वहीं प्रोफेसर गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि डिजिटल क्रिएटर्स के पास लाखों-करोड़ों लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की ताकत है। यह शक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

दूसरे सत्र में सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर चर्चा करते हुए इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमिश्नर गौरांग दास ने भगवद्गीता को जीवन के मार्गदर्शन का आधार बताते हुए युवाओं से भारतीय शास्त्रों को समझने और अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं बल्कि प्रेरणा केंद्र भी हैं।

लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता शेफाली वैद्य ने कहा कि बीते वर्षों में देश में सांस्कृतिक चेतना का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से स्थानीय मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित सामग्री तैयार कर समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का आह्वान किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सोशल मीडिया के युग में तथ्य तेजी से लोगों तक पहुंच रहे हैं। यह पारदर्शिता लोकतंत्र को मजबूत कर रही है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करते हुए समाज तक सही और तथ्यपरक जानकारी पहुंचाने की अपील की।

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