लखनऊ, 16 जून 2026:
कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल आज यूपी की धरती से निकलकर पूरी दुनिया में भारतीय संरक्षण मॉडल की सफलता का प्रतीक बन चुके हैं। लखनऊ के कुकरैल स्थित घड़ियाल पुनर्वास केंद्र ने इस दुर्लभ प्रजाति को नया जीवन देने के साथ वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण की एक मिसाल भी कायम की है। इस कारण नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने इसे भारत की सबसे सफल संरक्षण परियोजनाओं में शामिल करते हुए ‘मोस्ट सक्सेसफुल कंजर्वेशन प्रोजेक्ट इन इंडिया’ की रेटिंग दी है।
वर्ष 1970 के सर्वेक्षण में पूरे देश में घड़ियालों की संख्या घटकर मात्र 250 से 300 रह गई थी। तेजी से कम होती संख्या ने वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी थी। इस चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1975 में लखनऊ के कुकरैल में घड़ियाल पुनर्वास केंद्र की स्थापना की। संरक्षण कार्यक्रम के तहत चंबल नदी से घड़ियालों के अंडे लाकर कुकरैल में हैचिंग कराई गई। वैज्ञानिक देखरेख और अनुकूल वातावरण में पले इन बच्चों ने घड़ियाल संरक्षण की नई कहानी लिखनी शुरू कर दी।
आज कुकरैल केंद्र में 466 घड़ियाल मौजूद हैं। प्रतिवर्ष लगभग 140 से 160 नए घड़ियालों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष 1976 में जन्मे घड़ियालों को ‘मदर स्टॉक’ के रूप में विकसित किया गया जबकि 1988 से बंदी प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से अंडों की हैचिंग लगातार कराई जा रही है। लगभग ढाई वर्ष तक विशेष देखभाल के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास वाली नदियों में छोड़ा जाता है।

कुकरैल में पले-बढ़े घड़ियाल केवल प्रदेश या भारत तक सीमित नहीं हैं। यहां से भूटान, पाकिस्तान, जापान और अमेरिका के न्यूयॉर्क तक घड़ियाल भेजे जा चुके हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश का संरक्षण मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार किया जा चुका है।
कुकरैल केंद्र में तैयार घड़ियालों को गंगा, घाघरा, गेरुआ, गंडक और चंबल जैसी नदियों में छोड़ा जाता है। इससे प्राकृतिक आवासों में उनकी संख्या बढ़ने के साथ पारिस्थितिक संतुलन भी मजबूत हो रहा है। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य, दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य, हस्तिनापुर तथा महराजगंज, बहराइच और बाराबंकी की नदियों में भी घड़ियालों को देखा जा सकता है।
घड़ियाल पुनर्वास केंद्र आज ईको-टूरिज्म का बड़ा आकर्षण बन चुका है। यहां म्यूजियम, इंटरप्रिटेशन सेंटर, घड़ियाल मॉडल, पेयजल, शौचालय और विश्राम की सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर वर्ष करीब दो लाख घरेलू और 100 से अधिक विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार यूपी दुर्लभ वन्यजीवों का महत्वपूर्ण केंद्र है। घड़ियाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वहीं लुप्तप्राय परियोजना के वन संरक्षक संजय बिश्वाल ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत इस वर्ष 500 घड़ियाल के अंडों को प्राकृतिक आवास से लाकर कुकरैल में हैच कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे आने वाले वर्षों में घड़ियालों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद है।






