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ट्रेन में ‘नाक काटने’ की कोशिश : अविमुक्तेश्वरानंद को आरोपों में राहत, GRP को नहीं मिले सबूत

रीवा एक्सप्रेस में कथित हमले के मामले में जीआरपी ने जांच पूरी कर फाइनल रिपोर्ट दाखिल की, शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने कोर्ट जाने का किया ऐलान, जांच में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं हुई, आशुतोष महाराज ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग उठाई और फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने की बात कही

प्रयागराज, 19 जून 2026:

रीवा एक्सप्रेस में कथित हमले के मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिली है। जीआरपी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में कहा है कि जांच के दौरान ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिनके आधार पर शंकराचार्य और उनके शिष्यों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि की जा सके। इसके बाद मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई है।

यह मामला 8 मार्च 2026 का है। आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया था कि गाजियाबाद से प्रयागराज आ रही रीवा एक्सप्रेस में सिराथू स्टेशन के पास उन पर जानलेवा हमला हुआ। उन्होंने शिकायत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद समेत कुछ लोगों के नाम भी शामिल किए थे।

जीआरपी की रिपोर्ट आने के बाद आशुतोष महाराज ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने शुरुआत से ही सीसीटीवी फुटेज, कोच ड्यूटी रजिस्टर, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, यात्रियों के बयान समेत कई अहम बिंदुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उपलब्ध तथ्यों पर सही तरीके से विचार किए बिना जांच बंद कर दी गई।

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उन्होंने कहा कि वह फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करेंगे। साथ ही किसी स्वतंत्र एजेंसी से मामले की जांच कराने की मांग भी उठाएंगे। आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि उस समय के जीआरपी एसपी का झुकाव दूसरे पक्ष की ओर था। इसकी शिकायत उन्होंने पहले ही केंद्रीय अधिकारियों से की थी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि घटना की सच्चाई सामने लाना है।

उधर, जीआरपी के पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ने कहा कि जांच उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर की गई है। यदि शिकायतकर्ता को रिपोर्ट पर आपत्ति है तो वे पर्यवेक्षण अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकते हैं और कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं।

क्या था मामला

आशुतोष महाराज ने दावा किया था कि 8 मार्च को रीवा एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान एक अज्ञात हमलावर ने धारदार हथियार से उनकी नाक काटने की कोशिश की थी। घटना के बाद उन्होंने जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई थी और इलाज भी कराया था। इसी मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

रामभद्राचार्य के शिष्य हैं आशुतोष महाराज

शामली के कांधला कस्बे के रहने वाले आशुतोष महाराज शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर समिति से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में इसके प्रबंधक हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी, जिसके बाद से वह संन्यासी जीवन जी रहे हैं।

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