
लखनऊ, 1 जुलाई 2026:
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने 53वें जन्मदिन के मौके पर बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा और योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर, संविधान, पेपर लीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया। इसके साथ ही पीडीए को और मजबूत बनाने के लिए समर्थकों से सहयोग की भी अपील की।
अखिलेश यादव ने कहा कि राम हमारे थे और हमेशा हमारे पूजनीय रहेंगे। देश के हर सनातनी के घर में राम दरबार है। उसकी नियमित पूजा होती है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी भगवान राम के नाम पर राजनीति करती है। धर्म के नाम पर धन का खेल खेला जा रहा है। भाजपा ने संविधान, आस्था और श्रद्धा से खिलवाड़ किया है।
उन्होंने कहा कि मर्यादा का पहला नाम भगवान श्रीराम हैं। दूसरा नाम संविधान है लेकिन भाजपा दोनों के साथ विश्वासघात कर रही है। उनका आरोप था कि जनता ने अपने वोट से संविधान बचा लिया। इसलिए अब भाजपा सांसदों को तोड़कर संविधान बदलने की कोशिश कर रही है।
सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी पीढ़ियों से समाज से जुड़ी हुई है। उन्होंने माता प्रसाद पाण्डेय, सनातन पाण्डेय और बलराम यादव जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का जनाधार पीढ़ियों से बना हुआ है। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि भाजपा की प्राथमिकता नेशन नहीं, डोनेशन फर्स्ट है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम के मंदिर को लेकर इतने बड़े सवाल खड़े होना बेहद गंभीर है। पूरा देश जवाब मांग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदे से जुड़े विवादों के बीच सरकार पेपर लीक जैसे अहम मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। यदि कोई सवाल उठाता है तो उसके खिलाफ सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक से गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर गिरने से छात्र कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हो गए हैं जबकि सरकार उन पर भी दबाव बना रही है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा के शब्दकोष में न धर्म है, न शर्म। उन्होंने कहा कि असली संतों का अपमान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के जिले में पीएचसी और सीएचसी बंद हो रहे हैं। बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय भी बंद किए जा रहे हैं।






