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लखनऊ में साइबर ठगों की ‘कॉर्पोरेट फैक्ट्री’ का भंडाफोड़ : अमेरिका-कनाडा तक फैला अरबों की ठगी का नेटवर्क, 119 हिरासत में

समिट बिल्डिंग से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर 24 घंटे चला पुलिस का ऑपरेशन, 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल और फर्जी अरेस्ट वारंट बरामद, विदेशी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट, ई-वॉलेट और निवेश के नाम पर बनाते थे शिकार

लखनऊ, 2 जुलाई 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। विभूतिखंड स्थित चर्चित समिट बिल्डिंग के 11वें तल से संचालित दो कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर पुलिस ने दो प्रोग्राम मैनेजर समेत 119 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया है।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों के नागरिकों से डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग, ई-वॉलेट समस्या और फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर अरबों रुपये की साइबर ठगी कर चुका है। मंगलवार देर रात शुरू हुई कार्रवाई बुधवार शाम तक चली। पुलिस ने पहले दोनों कॉल सेंटरों के गेट सील किए और समिट बिल्डिंग को सुरक्षा घेरे में लेकर पूरे परिसर की तलाशी ली।
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ऑपरेशन के दौरान अहमदाबाद निवासी ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी, उसके सहयोगी विक्रम सिंह परमार सहित कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया गया। उनमें 92 युवक और 27 युवतियां शामिल हैं। ये गुजरात, महाराष्ट्र, असम समेत कई राज्यों के रहने वाले हैं।

पुलिस के मुताबिक जांच में खुलासा हुआ कि कॉल सेंटर में पढ़े-लिखे युवाओं को 30 से 40 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा जाता था। अधिक विदेशी नागरिकों को ठगी का शिकार बनाने वाले कर्मचारियों को 10 प्रतिशत तक इंसेंटिव दिया जाता था। इससे कई कर्मचारी हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपये तक कमा रहे थे। कर्मचारियों को विदेशी नागरिकों से धाराप्रवाह अंग्रेजी में बातचीत करने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी और हर संभावित सवाल का जवाब देने के लिए तैयार स्क्रिप्ट रटवाई जाती थी।

गिरोह इंटरनेट कॉलिंग के लिए आईबीम सॉफ्टवेयर और डॉलर ऐप का इस्तेमाल करता था। पहले विदेशी नागरिकों का डेटा जुटाया जाता, फिर खुद को अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों का कर्मचारी बताकर कॉल की जाती। ई-वॉलेट में तकनीकी खराबी, खरीदारी, रिफंड या गिफ्ट ऑफर का झांसा देकर लोगों से ओटीपी और बैंकिंग जानकारी हासिल कर उनके खाते खाली कर दिए जाते थे।
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कई मामलों में एसएमएस भेजकर टोल-फ्री नंबर पर कॉल कराने के बाद भी ठगी की जाती थी। इतना ही नहीं ये गिरोह डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर फर्जी अरेस्ट वारंट ईमेल के जरिए भेजता था। बदनामी का भय पैदा कर पीड़ितों से गिफ्ट कार्ड, डिजिटल कूपन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से रकम वसूलता था। शेयर बाजार में निवेश के नाम पर भी लोगों को फर्जी ग्रुपों में जोड़कर निवेश बढ़ने का झूठा आंकड़ा दिखाया जाता और बाद में टैक्स के नाम पर अतिरिक्त रकम लेकर उन्हें ब्लॉक कर दिया जाता था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन, कॉलिंग डेटा, हजारों बैंक और ई-वॉलेट संबंधी विवरण, फर्जी अरेस्ट वारंट तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम, क्राइम ब्रांच और पुलिस की कई टीमें आरोपियों से पूछताछ कर पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

ज्वाइंट सीपी अपराध अपर्णा कुमार, बबलू कुमार, डीआईजी साइबर क्राइम, पुलिस उपायुक्त डॉ. दीक्षा शर्मा और अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरण यादव ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की निगरानी की। पुलिस का मानना है कि पूछताछ से साइबर ठगी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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