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हरे निशान पर Share Market, Sensex-Nifty में बढ़त, Infosys चमका तो Trent के शेयर 10% टूटे

Weekly Expiry के दिन बाजार में खरीदारी का माहौल, रुपया डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत, आईटी और बैंकिंग शेयरों में तेजी, Trent के कमजोर संकेतों से निवेशकों में सतर्कता

बिजनेस डेस्क, 7 जुलाई 2026:

भारतीय शेयर बाजार ने आज मजबूती के साथ शुरुआत की। Sensex, Nifty, Bank Nifty और Stock Market से जुड़े शुरुआती संकेत निवेशकों के लिए सकारात्मक रहे। बाजार में खरीदारी का रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत हुआ।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 113 अंकों की बढ़त के साथ 78,400 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24,488 तक पहुंच गया और सोमवार का उच्च स्तर भी पार कर गया। बैंक निफ्टी में भी करीब 168 अंकों की तेजी दर्ज की गई।

शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक मजबूती आईटी सेक्टर में देखने को मिली। Infosys, HCL Tech, Shriram Finance, Titan और Max Healthcare के शेयर प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके अलावा सरकारी बैंक, रियल्टी और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी खरीदारी का अच्छा रुझान रहा।

निफ्टी के 50 शेयरों में से 29 बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 19 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और दो शेयर लगभग स्थिर रहे। यह संकेत देता है कि शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना हुआ था। दूसरी ओर टाटा समूह की रिटेल कंपनी Trent के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली।

शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 10 प्रतिशत तक टूट गया। यह गिरावट पहली तिमाही के बिजनेस अपडेट के बाद आई। हालांकि कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में स्टैंडअलोन राजस्व में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए इसे 5,666 करोड़ रुपये तक पहुंचाया, लेकिन बाजार की उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं रहने से निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

तिमाही के दौरान कंपनी ने एक नया वेस्टसाइड स्टोर और 19 नए ज़ूडियो आउटलेट शुरू किए। इसके साथ 30 जून तक देशभर में कंपनी के कुल स्टोरों की संख्या बढ़कर 1,312 हो गई। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी राहत भरे संकेत मिले। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भारतीय बाजार की धारणा पर सकारात्मक रहा। साथ ही रुपये की मजबूती ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। यही कारक आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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