
अनिल निषाद
अयोध्या, 13 जुलाई 2026:
राम मंदिर में चढ़ावे में घपले के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नया घटनाक्रम सामने आया है। हिंदू धर्म सेना के प्रमुख संतोष दुबे ने सोमवार को सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी से मुलाकात कर मामले से जुड़े दस्तावेज और दूसरे साक्ष्य सौंपे। इससे एक दिन पहले रविवार देर रात उन्होंने SIT के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना बयान भी दर्ज कराया था। अब जांच टीम उपलब्ध साक्ष्यों और अलग-अलग पक्षों के बयानों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।
ट्रस्ट भंग करने की मांग दोहराई
एक मोटी फाइल में दस्तावेज समेटे सीओ से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संतोष दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि मौजूदा ट्रस्ट पर उन्हें भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में शामिल लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने मांग की कि नए ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन के शहीद कारसेवकों के परिवारों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। संतोष दुबे ने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम सूर्यवंशी थे, इसलिए ट्रस्ट में कम से कम एक सूर्यवंशी क्षत्रिय को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक इससे ट्रस्ट में व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
आंदोलन से जुड़ाव का दिया हवाला
संतोष दुबे ने कहा कि वह राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और आंदोलन के दौरान लाठियां व गोलियां भी झेल चुके हैं। उनका कहना था कि मंदिर में कथित चोरी और गबन की खबरों से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। इसी वजह से उन्होंने मामले में उपलब्ध साक्ष्य जांच एजेंसियों को सौंपने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री भगवान श्रीराम और अयोध्या से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी।

संत समाज पर भी लगाए आरोप
बातचीत के दौरान संतोष दुबे ने अयोध्या के संत समाज को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि पूरे अयोध्या में केवल पांच संत ही ईमानदार हैं, जबकि बाकी लोगों पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से सजा दी जाए।






