लखनऊ, 25 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ की अलीगंज कॉलोनी के सेक्टर-डी स्थित अवैध व्यावसायिक भवन में गत 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की दर्दनाक मौत के करीब एक महीने बाद आखिरकार प्रशासन का बुलडोजर चला। शनिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भारी फोर्स और मशीनों के साथ उस बहुमंजिला भवन को ध्वस्त करना शुरू कर दिया जिसे अवैध रूप से बनाया गया था।
एलडीए के दर्जनों अधिकारी और कर्मचारी शनिवार सुबह तीन बुलडोजर तथा एक हाइड्रोलिक मशीन के साथ मौके पर पहुंचे। पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया गया और सुरक्षा के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। ऊपरी हिस्से तक मशीनें पहुंचाने के लिए पहले मलबे का रैंप बनाया गया। इसके बाद ध्वस्तीकरण शुरू हुआ। एलडीए का कहना है कि पूरी इमारत को जमींदोज करने में समय लग सकता है।

22 जून को इसी बिल्डिंग में संचालित एनिमेशन सेंटर में भीषण आग लगी थी। हादसे में 15 लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जबकि नौ लोग घायल हुए थे। पांच लोगों ने पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरकर जान बचाई थी। एक युवक दूसरी मंजिल से कूद गया था और गंभीर रूप से घायल हो गया था।

जांच में सामने आया कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन का अवैध रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था और निर्माण भी नियमों के विपरीत था। इसके बाद एलडीए ने भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल को नोटिस जारी किया। 10 जुलाई को विहित न्यायालय ने 15 दिन के भीतर स्वयं अवैध निर्माण गिराने का आदेश दिया था। 25 जुलाई तक आदेश का पालन नहीं होने पर एलडीए ने खुद बुलडोजर चलाकर कार्रवाई शुरू कर दी।

हालांकि ध्वस्तीकरण के दौरान भवन मालिक के अधिवक्ता राजेंद्र शुक्ला ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि 25 जुलाई तक का समय देने के बावजूद उसी दिन बिना अलग ध्वस्तीकरण आदेश के कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही। इस बीच सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही पर खड़ा है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हादसे के बाद मौके पर पहुंचकर अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात और एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार की निगरानी में एसआईटी गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी लेकिन अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है। कार्रवाई के नाम पर केवल पांच अधिकारी-कर्मचारी निलंबित हुए हैं। एक भवन स्वामी अब भी फरार है और उस पर घोषित इनाम बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है। ऐसे में बुलडोजर तो चल गया लेकिन हादसे के असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई का सवाल अब भी अनुत्तरित है।






