राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 1 अगस्त 2026ः
देहरादून के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में प्रशिक्षणरत भारतीय वन सेवा के 2024 बैच के परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान में सम्पन्न हो गया। इस दौरान मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले वन अधिकारियों को प्रमाणपत्र व पदक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि भविष्य में ये अधिकारी भारत के विकास के महत्वपूर्ण दौर के साक्षी बनेंगे।
समारोह में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि आईजीएनएफए जैसी प्रतिष्ठित संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त करना अधिकारियों के लिए गौरव का विषय है। जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होगी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का संरक्षण और मरुस्थलीकरण जैसी चुनौतियां आने वाले वर्षों में वन अधिकारियों के सामने प्रमुख रूप से रहेंगी। इनसे निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी को साथ लेकर चलना होगा।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तकनीकों का उपयोग केवल आंकड़ों के विश्लेषण तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक समाधान विकसित करने में किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को संदेश देते हुए कहा कि एक सफल अधिकारी बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है। उन्होंने आत्म मूल्यांकन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक अधिकारी को अपने अनुभवों के आधार पर समाज व राष्ट्र की सेवा में बेहतर योगदान देना होगा।
आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने कहा कि 2024 बैच में कुल 111 प्रशिक्षु अधिकारी थे, जिसमें 21 महिला अधिकारी और दो भूटान के प्रशिक्षु शामिल थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1938 में स्थापित यह संस्थान अब तक स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ-साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को सम्मानित किया गया। इसमें राजस्थान संवर्ग की प्रतीक्षा नानासाहेब काले 2024 बैच की टॉपर रहीं।






