
लखनऊ, 5 अगस्त 2026:
समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा पीडीए (PDA) की नई व्याख्या किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अखिलेश यादव ने पीडीए में ‘P’ का अर्थ केवल ‘पिछड़ा’ नहीं, बल्कि ‘पंडित’ और ‘पीड़ित’ भी बताया। उनके इस बयान पर बुधवार को राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे चुनावी रणनीति करार दिया।
आरएलडी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा ने कहा कि कल तक पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताने वाले अखिलेश यादव अब चुनाव नजदीक आते ही ब्राह्मण और अन्य सवर्ण समाज की बात करने लगे हैं। उनके अनुसार यह बदलाव केवल चुनावी अवसरवाद का परिचायक है। जनता इसके पीछे की राजनीतिक मंशा को अच्छी तरह समझती है।
आरएलडी नेता ने कहा कि प्रदेश की जनता उन घटनाओं को नहीं भूली है, जिनमें तत्कालीन एडीएम वैभव मिश्रा के साथ कथित अभद्र व्यवहार और एक पत्रकार के साथ कथित अपमानजनक टिप्पणी की चर्चा रही थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अखिलेश यादव के उन पुराने बयानों को लोग आज भी याद रखते हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि बड़ी-बड़ी पोस्टों पर ऊंची जाति के लोग बैठे हैं।
अनुपम ने आरोप लगाया कि जो लोग समय-समय पर सनातन परंपरा, उसके प्रतीकों और आस्थाओं को लेकर विवादित टिप्पणियों से जुड़े रहे हों, उनके मुंह से आज सामाजिक समरसता और सभी वर्गों के सम्मान की बातें जनता को सहज नहीं लगतीं। उन्होंने कहा कि यदि सवर्ण समाज के प्रति यह भावना वास्तविक होती तो यह पहले भी उनके राजनीतिक व्यवहार और सार्वजनिक बयानों में दिखाई देती।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और सामाजिक समरसता की राजनीति में विश्वास करता है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब केवल नए नारों या बदली हुई परिभाषाओं से प्रभावित नहीं होगी बल्कि नेताओं के पुराने आचरण और कार्यों के आधार पर अपना निर्णय करेगी।






