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महुआ-श्रीअन्न ने बदली तस्वीर : आदिवासी महिलाओं की उद्यमिता बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

यूपी के सोनभद्र में सरकारी योजनाओं, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से जनजातीय महिलाएं बना रहीं मिलेट्स व महुआ आधारित उत्पाद, हर साल हो रही लाखों रुपये की अतिरिक्त आय

लखनऊ, 15 जुलाई 2026:

कभी विकास और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला यूपी का सोनभद्र जिला आज महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण उद्यमिता का नया मॉडल बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की सीमाओं से सटे इस जनजातीय बहुल क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब महुआ और श्रीअन्न (मिलेट्स) आधारित उत्पादों के जरिए अपनी आर्थिक पहचान बना रही हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और श्रीअन्न को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने इस बदलाव को नई दिशा दी है।

सोनभद्र की सीडीओ जागृति अवस्थी के अनुसार एक समय ऐसा था जब जिले में रोजगार के सीमित अवसर और सड़क, बिजली, पेयजल व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी विकास में सबसे बड़ी बाधा थी। कुछ वर्षों में सरकारी योजनाओं की बेहतर पहुंच और आधारभूत ढांचे के विस्तार से हालात तेजी से बदले हैं। आज जिन गांवों में विकास की गति धीमी थी वहीं की महिलाएं अपने उत्पाद देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाकर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

योगी सरकार की पहल से श्रीअन्न अब केवल खेती तक सीमित नहीं रहा। वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन गया है। स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, पैकेजिंग और विपणन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप महिलाएं रागी मिलेट लड्डू, अलसी के लड्डू, मिलेट कुकीज, मिलेट बिस्किट, मिलेट नमकीन और अन्य पौष्टिक उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है।

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घोरावल ब्लॉक के दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 15 से अधिक महिलाएं मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद बनाकर हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक की बिक्री कर रही हैं। इससे समूह की हर महिला को सालाना करीब एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है। यह समूह अब आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है।

वहीं, आदिवासी बहुल म्योरपुर विकास खंड के लिलासी गांव का खुशबू आजीविका स्वयं सहायता समूह भी बदलाव की मिसाल है। समूह की सदस्य सुनीता देवी बताती हैं कि 14 महिलाएं महुआ के लड्डू और सांवा जैसे पारंपरिक एवं पौष्टिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग अब स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इससे महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही हैं। प्रियंका, संगीता, जिरमन, सोनकुंवर, पुष्मतिया, मलावती, हीरामनी और रीना जैसी महिलाएं भी इस बदलाव की सशक्त मिसाल हैं।

सीडीओ का कहना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों से नहीं जोड़ा जा रहा बल्कि उन्हें कौशल विकास, स्वरोजगार और समूह आधारित उद्यम के लिए भी तैयार किया जा रहा है। यही कारण है कि कभी विकास की मुख्यधारा से दूर माने जाने वाले जनजातीय क्षेत्रों की महिलाएं आज अपने उत्पादों के दम पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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