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लखनऊ में शुरू हुआ बड़ा ‘ऑपरेशन सफाई’… सई नदी में अब नहीं बहेगा 59.88 एमएलडी गंदा पानी

बिजनौर में बन रहा 100 एमएलडी एसटीपी, नमामि गंगे के तहत नालों की टैपिंग से लेकर शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल तक बड़ा प्लान, 2044 तक 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता तैयार करने का लक्ष्य

लखनऊ, 21 अगस्त 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ से होकर गुजरने वाली सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में अब बड़े स्तर पर काम शुरू हो गया है। नदी में सीधे गिरने वाले नालों की पहचान कर उनकी टैपिंग की जा रही है। सीवेज को शोधित करने के लिए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार किए जा रहे हैं। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चल रही इस योजना का मकसद सई नदी में अशोधित सीवेज की एक बूंद भी पहुंचने से रोकना और शोधित पानी का अधिकतम पुन: उपयोग सुनिश्चित करना है।

लखनऊ नगर क्षेत्र में सई नदी में गिरने वाले एक प्रमुख अनटैप्ड नाले की पहचान हो चुकी है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज सीधे नदी में पहुंच रहा है। फिलहाल इसे सई नदी के प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में माना जा रहा है। नाले को टैप कर सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि नदी में जाने से पहले इसका उपचार हो सके।

100 एमएलडी बिजनौर एसटीपी से बदलेगी तस्वीर

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इस नाले के सीवेज को रोकने के लिए 100 एमएलडी क्षमता वाले बिजनौर एसटीपी की परियोजना पर काम चल रहा है। परियोजना का कार्यादेश 2 जून 2025 को जारी हुआ था। गत 23 जून से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। एसटीपी तैयार होने के बाद नाले से आने वाले सीवेज का उपचार किया जा सकेगा। इससे सई नदी में सीधे पहुंचने वाले बड़े पैमाने के अशोधित सीवेज पर रोक लगेगी।

2044 तक 1263 एमएलडी की क्षमता

लखनऊ में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित एसटीपी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। यह क्षमता वर्ष 2044 तक शहर में पैदा होने वाले सीवेज के उपचार के लिए पर्याप्त आधार तैयार करेगी। यह योजना सिर्फ आज की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है। यह भविष्य की बढ़ती आबादी और सीवेज की मात्रा को भी ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
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गंदा पानी नहीं, अब शोधित पानी होगा काम का

सीवेज ट्रीटमेंट के साथ शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी जोर है। 39 एमएलडी दौलतगंज एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग के लिए 16 एमएलडी टीटीपी का निर्माण चल रहा है। इस पानी को पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। इसी तरह 3.5 एमएलडी एसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी का इस्तेमाल राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में बागवानी और सफाई के लिए किया जाएगा। इससे इन कार्यों में स्वच्छ जल की खपत घटेगी।

इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचेगा शोधित पानी

बिजनौर के निर्माणाधीन 100 एमएलडी एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी को चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। मंजूरी मिलने पर एयरपोर्ट की विभिन्न जरूरतों में इसका उपयोग किया जा सकेगा। इससे साफ पानी की बचत के साथ सीवेज से निकलने वाले उपचारित पानी का अधिकतम इस्तेमाल संभव होगा।

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह के मुताबिक पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अशोधित सीवेज को सई नदी में पहुंचने से रोकना है। नालों की टैपिंग, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और शोधित पानी के पुन: उपयोग को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे सई नदी पर प्रदूषण का दबाव घटाने के साथ लखनऊ की सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को भी भविष्य के लिए मजबूत किया जा सकेगा।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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