
योगेंद्र मलिक
पौड़ी गढ़वाल, 27 अगस्त 2026:
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में रक्षाबंधन के मौके पर ग्रामीण महिलाओं की बनाई राखियां बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। पीरूल, रंगीन धागों सहित पहाड़ी सामग्री से तैयार इन राखियों ने महिलाओं को घर से काम करने का मौका दिया है। कई महिलाएं राखियों के साथ दूसरे हस्तनिर्मित उत्पाद बनाकर भी आमदनी बढ़ा रही हैं। होने वाली कमाई से इनका पर्व भी खुशियों से भर गया है।
पीरूल के धागों से निखर रहीं राखियां
भिताईं मल्ली गांव की विजया देवी लंबे समय से घर पर हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं। वह पीरूल के धागों सहित स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल कर अलग-अलग डिजाइन की राखियां बनाती हैं। उनकी बनाई राखियों की स्थानीय बाजार में मांग है। Self Help Group व ब्लॉक स्तर की मदद से इन उत्पादों को दूसरे स्थानों तक भी पहुंचाया जा रहा है।

राखियों के साथ तैयार हो रहे अन्य पहाड़ी उत्पाद
निसणी गांव की रीना देवी भी राखियां बनाने के साथ दूसरे पहाड़ी उत्पाद तैयार कर रही हैं। वह जैविक रंग, टोकरियां सहित कई हस्तनिर्मित सामान बनाती हैं। उनका कहना है कि ब्लॉक स्तर पर मिले प्रशिक्षण व काम से जुड़े सहयोग ने स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद की।
प्रशिक्षण से मिला बाजार का रास्ता
महिलाओं को स्थानीय संसाधनों से रोजगार से जोड़ने के लिए हिमोत्थान के सहयोग से NRLM के तहत प्रशिक्षण दिया गया है। इसके बाद महिलाएं पीरूल सहित पारंपरिक सामग्री से उपयोगी सामान तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के जरिए काम किया जा रहा है।

राखियों की बिक्री पर फोकस
मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रक्षाबंधन को देखते हुए महिलाओं की बनाई पारंपरिक राखियों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी फोकस किया गया है।
घर के पास काम का मौका
अधिकारियों के मुताबिक प्रशिक्षण से लेकर उत्पाद की बिक्री तक महिलाओं को सहयोग देने की कोशिश की जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं को घर के आसपास ही काम का अवसर मिल रहा है।






