Uttarakhand

उत्तराखंड में सेब की नई क्रांति… किसानों की आमदनी के खुलेंगे नए रास्ते, मुख्य सचिव ने दिए ये निर्देश

उत्तराखंड में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में सेब की अति सघन बागवानी योजना को लागू करने, हाई डेंसिटी प्लांट्स और कोल्ड स्टोरेज विकसित करने, तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए क्लस्टर आधारित उत्पादन और तकनीकी समर्थन पर जोर दिया गया

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 16 जनवरी 2026:

उत्तराखंड के सचिवालय में आज मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में “सेब की अति सघन बागवानी योजना” पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट के उत्पादन को बढ़ाने और किसानों की आय सुधारने के उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रीय और अन्य राज्यों के उत्पादन आंकड़ों की तुलना करते हुए उत्तराखंड की उत्पादन क्षमता का विश्लेषण प्रस्तुत किया।

हाई डेंसिटी सेब प्लांट्स से उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

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मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में अभी भी पुरानी और कम उत्पादन क्षमता वाली किस्मों की खेती होती है। उन्हें हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स से बदलने की आवश्यकता है। इस दिशा में किसानों को क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में सेब और अन्य फलों के उत्पादन को बढ़ाकर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना है।

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कोल्ड स्टोरेज से ऑफ-सीजन लाभ सुनिश्चित

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि हर्षिल स्थित कोल्ड स्टोरेज की तरह अन्य जिलों में भी स्टोरेज की सुविधा विकसित की जाए। इससे किसान अपने फलों को ऑफ-सीजन में बाजार में उतारकर अधिक लाभ कमा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए उत्पादन लक्ष्यों का निर्धारण करना और उन्हें धरातल पर लागू करना जरूरी है।

नर्सरी और तकनीकी समर्थन का व्यापक ढांचा

मुख्य सचिव ने उत्पादन की भावी मांग को ध्यान में रखते हुए नर्सरियों को अपग्रेड करने और बड़े पैमाने पर हाई डेंसिटी प्लांट्स तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए फुल टाइम तकनीकी सपोर्ट के लिए पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) गठित करने की योजना बनाई गई, ताकि योजना के संचालन और मॉनिटरिंग में निरंतरता बनी रहे।

अधिकारियों की भागीदारी और आगे की योजना

इस बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम और डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, क्लस्टर आधारित बागान स्थापित करने और किसानों के लिए लाभकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।

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