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24 हजार स्टार्टअप, 8 यूनिकॉर्न… योगी बोले- UP की आबादी चुनौती नहीं, सबसे बड़ा ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’

लोकभवन में 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि, सीएम ने लॉन्च किया यूपी स्टार्टअप मिशन पोर्टल, बोले- देश के कुल स्टार्टअप में यूपी की हिस्सेदारी 20% तक पहुंचाने की तैयारी

लखनऊ, 27 अगस्त 2026:

यूपी की 25 करोड़ से अधिक आबादी को अक्सर चुनौती के तौर पर देखने वालों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक अलग तस्वीर दिखाई। लोकभवन में आयोजित स्टार्टअप कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी वास्तव में उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को सही प्लेटफॉर्म मिले तो यही आबादी प्रदेश के लिए ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ बन सकती है। इसी सोच के साथ सरकार ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई रफ्तार देने के लिए स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की।

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मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप नीति के तहत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। कार्यक्रम में उन्होंने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 पुस्तिका का विमोचन और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया। इस दौरान एक लघु फिल्म के जरिए प्रदेश में तेजी से तैयार हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम की तस्वीर भी दिखाई गई।

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500 से ढाई लाख तक पहुंचा देश का स्टार्टअप सफर

युवा उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने देश में स्टार्टअप क्रांति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में महज करीब 500 स्टार्टअप्स थे। आज यह संख्या ढाई लाख से अधिक हो चुकी है। उनके मुताबिक स्टार्टअप इकोसिस्टम ने देश के युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए नया प्लेटफॉर्म तैयार किया है।

उत्तर प्रदेश में भी तस्वीर तेजी से बदली है। मुख्यमंत्री के अनुसार 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप्स थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक हो गई है। इनमें 8 यूनिकॉर्न भी शामिल हैं। सरकार ने नई नीति के तहत 12 नए इनक्यूबेटर्स को मान्यता देने की बात भी कही।

‘बीमारू यूपी’ से टॉप-3 इकोनॉमी तक का दावा

मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश और वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि उस दौर में रोजगार, इनोवेशन, शिक्षा और इनक्यूबेटर्स जैसे विषयों पर चर्चा करना भी एक सपना था। उन्होंने प्रदेश में खराब कानून-व्यवस्था, बिजली और सड़कों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय यूपी की धारणा नकारात्मक बन चुकी थी।

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योगी ने कहा कि उस समय पांच वर्षों में 700 से अधिक दंगे हुए और आम लोगों को कर्फ्यू के साये में जीवन बिताना पड़ता था। सरकार की इच्छाशक्ति और नीतियों के अभाव ने अनंत संभावनाओं वाले प्रदेश को ‘बीमारू’ बना दिया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 और 2018-19 में शुरू किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब सामने हैं। उनके मुताबिक कभी बॉटम-3 में गिने जाने वाला यूपी आज देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, महिला वर्कफोर्स की भागीदारी और बड़े उद्योगों की संख्या तीन गुनी हुई है।

आधे स्टार्टअप्स की कमान ‘आधी आबादी’ के हाथ

योगी आदित्यनाथ ने स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब आधे स्टार्टअप्स का संचालन ‘आधी आबादी’ कर रही है। सरकार ने आईआईटी कानपुर, बीएचयू, ट्रिपल आईटी, एकेटीयू और आईआईएम जैसे संस्थानों से आने वाले प्रस्तावों को प्रोत्साहित करने के लिए फंड और सहयोग उपलब्ध कराया है।

उन्होंने बताया कि स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 2019 में सरकार ने सिडबी के साथ ‘फंड ऑफ फंड्स’ की व्यवस्था की थी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस फंड की राशि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

डीपटेक से क्वांटम और ग्रीन हाइड्रोजन तक फोकस

सरकार अब स्टार्टअप को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय उभरती तकनीकों की ओर ले जाने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी कानपुर मेडटेक और ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना चाहता है, आईआईटी बीएचयू यूपीएग्रीज के साथ काम कर रहा है और एसजीपीजीआई भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करना चाहता है।

सरकार इन संस्थानों को क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में हरसंभव सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में एक दर्जन से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के संचालन या निर्माण की दिशा में काम चल रहा है।

‘यूपी का हिस्सा 20 फीसदी होना चाहिए’

मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप इकोसिस्टम में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश की आबादी में यूपी की हिस्सेदारी करीब एक-छठे की है, जबकि कुल स्टार्टअप्स में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब एक-दसवें के आसपास है। ऐसे में भारत के कुल स्टार्टअप्स में यूपी का हिस्सा कम से कम 20 प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने डीपटेक समेत विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े संस्थानों से इस लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने का आह्वान किया।

‘यूपी में जमीन, सुरक्षा और पॉलिसी- तीनों मौजूद’

मुख्यमंत्री ने निवेश और स्टार्टअप के लिए प्रदेश की सुविधाओं को गिनाते हुए कहा कि यूपी अब पॉलिसी पैरालिसिस से बाहर निकल चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जमीन और सुरक्षा की समस्या नहीं है और लगभग हर क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। योगी ने कहा कि सरकार स्टार्टअप्स को लीज पर जमीन और प्लग एंड प्ले मॉडल पर स्पेस उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। जरूरत पड़ने पर सिडबी के साथ फंड ऑफ फंड्स की राशि भी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हर कदम पर साथ खड़ी रहेगी।

कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव आलोक कुमार, एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय समेत अन्य अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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