
लखनऊ, 1 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वाइन फ्लू (H1N1) का संक्रमण पैर पसारता नजर आ रहा है। शहर में चार नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इनमें दो मरीज एसजीपीजीआई और दो मरीज डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में सामने आए हैं। चारों मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक सभी की हालत फिलहाल स्थिर है। नए मामलों के साथ स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तरीय अस्पतालों में तैयारियां बढ़ा दी हैं।
इस सीजन में राजधानी में स्वाइन फ्लू से एक मौत भी हो चुकी है। बलरामपुर अस्पताल में अब तक तीन पॉजिटिव केस मिल चुके हैं, जिनमें इंदिरानगर निवासी 50 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत हुई थी। महिला को सर्दी-जुकाम, तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी के बाद 25 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में परिजनों ने अस्पताल को निजी पैथोलॉजी की स्वाइन फ्लू पॉजिटिव रिपोर्ट दिखाई।
रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने महिला के संपर्क में आए डॉक्टरों, कर्मचारियों और मरीजों की जांच शुरू की। इलाज में शामिल डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए और संबंधित स्टाफ को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया।
अस्पतालों में बेड रिजर्व, दवाओं का स्टॉक तैयार
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ के जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए बेड रिजर्व किए गए हैं। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के साथ संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए डेडिकेटेड टीमें लगाई गई हैं। बलरामपुर अस्पताल में मरीजों के लिए विशेष ब्लॉक भी बनाया गया है।

हालांकि, संक्रमण की वास्तविक तस्वीर सामने आने में जांच व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन रही है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक जागरूकता की कमी के कारण कई लोग लक्षण होने के बावजूद जांच नहीं करा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भी फिलहाल मुख्य रूप से ग्रुप-सी श्रेणी के मरीजों के ही नमूने लेने के निर्देश हैं। इस श्रेणी में ऐसे मरीज आते हैं, जिनमें सांस फूलना, ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे गंभीर लक्षण हों और जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया हो।
जांच के लिए निजी लैब का सहारा, 6 हजार तक खर्च
सरकारी अस्पतालों में जांच की सीमित व्यवस्था के चलते संदिग्ध मरीज निजी केंद्रों का रुख कर रहे हैं। शहर में फिलहाल बड़े निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर ही स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है। इन केंद्रों पर जांच के लिए 5,500 से 6,000 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। अलग-अलग केंद्रों पर अलग कीमत होने के कारण मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
जिले में 250 से अधिक निजी पैथोलॉजी हैं लेकिन सभी जगह स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा नहीं है। कई पैथोलॉजी संचालक सीएमओ की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। निजी केंद्रों से पॉजिटिव आने वाले मामलों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेजी जा रही है।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के मुताबिक निजी जांच केंद्र संचालकों के साथ बैठक कर स्वाइन फ्लू जांच का शुल्क निर्धारित किया जाएगा। तय दर से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल केजीएमयू, लोहिया संस्थान और एसजीपीजीआई में स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है और सरकारी अस्पतालों से नमूने इन संस्थानों में भेजे जा रहे हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य मौसमी फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार और ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान, सिरदर्द और नाक बहना या बंद होना शामिल है। कुछ मरीजों में मतली, उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण हों तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं
सांस लेने में कठिनाई, सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, लगातार चक्कर या भ्रम, गंभीर अथवा लगातार उल्टी और त्वचा या होंठ नीले पड़ना गंभीर संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।






