
लखनऊ, 23 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में पुरनिया चौराहे के पास तीन मंजिला बिल्डिंग में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। यह केवल एक हादसा नहीं अपितु सरकारी तंत्र की लापरवाही, नियमों की अनदेखी और जवाबदेही के अभाव का भयावह चेहरा बनकर सामने आया है। रिहायशी इलाके में नियमों को ताक पर रखकर खड़ी यह कमर्शियल बिल्डिंग सुरक्षा मानकों से कोसों दूर थी और समय रहते कार्रवाई होती तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टल सकती थी।
यह लखनऊ का अब तक का सबसे बड़ा अग्निकांड माना जा रहा है। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी दोषियों पर सिर्फ जांच होगी या फिर वास्तविक कार्रवाई भी होगी? क्योंकि राजधानी में इससे पहले हुए बड़े अग्निकांडों में जांच तो हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई से बचते रहे।
अलीगंज हादसे से करीब दो माह पहले 15 अप्रैल 2026 को विकासनगर सेक्टर-11 की एक अवैध झुग्गी बस्ती में आग लगने से 50 से अधिक एलपीजी सिलिंडरों में विस्फोट हुए थे। इस हादसे में दो बच्चों की मौत हो गई थी और एक हजार से अधिक लोग बेघर हो गए थे।

इससे पहले 14 अप्रैल 2025 को लोकबंधु अस्पताल में लगी भीषण आग में एक मरीज की जान चली गई, जबकि 27 अप्रैल 2025 को कपूरथला की एक इमारत में आग लगने से छज्जा गिरा और छह दमकल कर्मी घायल हो गए। 3 मई 2025 को सरोजनीनगर की एक फूड फैक्टरी में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में एक व्यक्ति की मौत हुई थी।
एक बड़ा अग्निकांड 5 सितंबर 2022 को लखनऊ के पॉश एरिया हजरतगंज क्षेत्र में हुआ। मदन मोहन मालवीय मार्ग स्थित होटल लेवाना सुइट में लगी आग आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। आपातकालीन निकास न होने और खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल लगी होने से इस हादसे में चार लोगों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई थी। जांच समिति ने निर्माण से लेकर संचालन तक गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की थी।
तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर कई अधिकारियों के नाम शासन को भेजे गए लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी तरह 18 जून 2018 को चारबाग स्थित होटल एसएसजे इंटरनेशनल और होटल विराट में लगी आग में आठ लोगों की जान चली गई थी। जांच में 40 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए गए, फिर भी किसी पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार दोहराए जा रहे इन हादसों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हर त्रासदी के बाद केवल जांच समितियां बनेंगी और फाइलें चलेंगी, या फिर इस बार जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय होगी। अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर साबित किया है कि जब तक नियम तोड़ने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक राजधानी में आग की ऐसी त्रासदियां दोहराती रहेंगी।






