
बिजनेस डेस्क 1 सितंबर 2026:
भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबार की शुरुआत मामूली गिरावट के साथ की। सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स 76,952.08 के स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें 5.19 अंकों की हल्की गिरावट रही। निफ्टी 24,065.05 पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 15.36 अंक नीचे था।
निवेशकों की नजर कच्चे तेल पर
बाजार में इस समय सबसे बड़ी चिंता ब्रेंट क्रूड की कीमतों को लेकर बनी हुई है। कच्चा तेल 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। तेल की कीमत लंबे समय तक इसी स्तर पर रहने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
महंगा तेल क्यों है चिंता की वजह
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर ईंधन लागत पर पड़ता है। इससे परिवहन से लेकर उत्पादन तक खर्च बढ़ सकता है। महंगाई पर दबाव बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंकों के सामने ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की चुनौती रह सकती है। इसी वजह से निवेशक क्रूड की चाल पर लगातार नजर रख रहे हैं।
निफ्टी के लिए 24,190 अहम स्तर
तकनीकी नजर से निफ्टी के लिए 50-day EMA करीब 24,190 का स्तर अहम माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी अगर इस स्तर के ऊपर टिकता है तो आने वाले सत्रों में 24,300 से 24,350 के जोन की तरफ बढ़ने की गुंजाइश बन सकती है।
24,076 के नीचे फिसला तो दबाव बढ़ेगा
दूसरी तरफ 24,076 का स्तर निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट है। यह हाल का साप्ताहिक निचला स्तर है। इसके नीचे कमजोरी आने पर निफ्टी का near-term outlook कमजोर पड़ सकता है। इसलिए कारोबार के दौरान इस स्तर पर खास नजर रहेगी।
ग्लोबल मार्केट में भी दबाव
एशियाई बाजारों में मंगलवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। निक्केई 225 फ्यूचर्स में करीब 0.4 फीसदी की गिरावट रही, जबकि जापान का टॉपिक्स 0.5 फीसदी ऊपर था। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 करीब 0.3 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग के हैंग सेंग में 1.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी नीचे रहा। यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी करीब 0.2 फीसदी की कमजोरी रही। S&P 500 फ्यूचर्स में खास बदलाव नहीं दिखा।
रुपये में दिखी 26 पैसे की मजबूती
घरेलू बाजार के बीच रुपये में मंगलवार सुबह मजबूती देखने को मिली। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 26 पैसे मजबूत होकर 94.96 के स्तर पर पहुंच गया। घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती, राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण की उम्मीदों के साथ पोर्टफोलियो निवेश से जुड़े फ्लो को रुपये की मजबूती की वजह माना जा रहा है।






