
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 7 सितम्बर 2026ः
मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद भी बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ धामी सरकार की कार्रवाई जारी है। निरीक्षण के दौरान ऐसे मदरसों को जिला प्रशासन सील कर रहा है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने कहा है कि मदरसा बंद होने के बाद वहां के बच्चों को पास के अल्पसंख्यक विद्यालय में दाखिला दिया जाएगा। इसके लिए बंद मदरसों के प्रबंधकों को पत्र देना होगा। यह भी कहा गया है कि यदि कोई मदरसा 30 सितंबर तक मान्यता के लिए आवेदन करता है तो उसके आवेदन को स्वीकार किया जाएगा। राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश में कुल 452 मदरसों में से अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है।
सील किए गए मदरसों में ऊधमसिंह नगर के आठ, हरिद्वार के चार, नैनीताल के चार व देहरादून का एक शामिल है। वहीं, तीन मदरसा प्रबंधकों ने स्वयं मदरसा बंद करने की लिखित सूचना दी थी। इसके अलावा 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि 35 मदरसों को सरकार की ओर से मान्यता दी जा चुकी है। अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों और मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में लागू नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक शिक्षा के साथ निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन कराया जाएगा।
सचिव डॉ. धकाते ने कहा कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर संचालित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में अत्छी और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। कहा कि नियमों का पालन कराने के लिए प्रशासन की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।






