
देहरादून, 8 सितंबर 2026:
उत्तराखंड में सीमावर्ती गांवों के विकास को लेकर वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक में प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता तय करने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई बैठक में फेज-1 व फेज-2 के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों पर चर्चा हुई। कई परियोजनाओं को समिति की मंजूरी भी मिली।
कनेक्टिविटी से लेकर पर्यटन पर फोकस
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों में सड़क, बिजली ग्रिड, नेटवर्क, टीवी व संचार सुविधाओं से जुड़े कामों को प्राथमिकता दी जाए। पर्यटन को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट्स के साथ ऐसे काम भी चुने जाएं, जिनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
सेना की जरूरतों को भी प्रस्ताव में जगह
बैठक में निर्देश दिए गए कि परियोजनाएं तैयार करते समय सेना, SSB व ITBP से जुड़ी जरूरी परियोजनाओं को भी समिति के सामने रखा जाए। संबंधित जिलों की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता तय करने को कहा गया।
पहले तय होगी रैंकिंग, फिर केंद्र को प्रस्ताव
मुख्य सचिव ने कहा कि भारत सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों में परियोजनाओं की प्राथमिकता साफ होनी चाहिए। जिलों से प्राथमिकता हासिल करने के बाद प्रोजेक्ट्स की सूची प्राथमिकता के घटते क्रम में तैयार की जाए।
दूसरी योजनाओं से मिल सके पैसा तो वहां से फंडिंग
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन परियोजनाओं के लिए केंद्र या राज्य सरकार की दूसरी योजनाओं से पैसा मिल सकता है, उन्हें उन्हीं योजनाओं के जरिए पूरा कराने की कोशिश की जाए। ऐसे प्रोजेक्ट्स को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की सूची से हटाकर उनकी जगह दूसरी जरूरी परियोजनाएं शामिल की जा सकती हैं।

हर जिले से पांच बड़े प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने फेज-1 व फेज-2 की सभी परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने के बाद ही उन्हें केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए। संबंधित हर जिले से पांच बड़े व महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा गया। इनका चयन करते समय कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाएं, पर्यटन, आजीविका, स्थानीय जरूरतों के साथ सीमावर्ती इलाकों की रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, डीजी कारागार अभिनव कुमार, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, सी रविशंकर, आईजी डॉ नीलेश आनंद भरणे समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






