
लखनऊ, 8 सितंबर 2026:
यूपी में बाढ़ की चुनौती के बीच प्रदेश सरकार ने राहत और बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलों के बीच प्रशासनिक अमला पूरी तरह एक्टिव मोड में है। सरकार का दावा है कि प्रभावित लोगों तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 19,496 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इसके साथ ही बाढ़ से जनहानि शून्य है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए 1,634 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1,072 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। लोगों को सुरक्षित निकालने के अभियान में 2,161 नाव और मोटरबोट लगातार जुटी हुई हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोमवार को ही करीब 6,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रभावित परिवारों के लिए प्रदेश में 1,315 शरणालय बनाए गए हैं। इनमें जरूरतमंदों को ठहराने और भोजन समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
राहत सामग्री की बात करें तो अब तक 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट और 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। बाढ़ के बाद बीमारियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी जोर दिया है। प्रभावित इलाकों में 6.68 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.60 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट बांटे गए हैं।

बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में भी प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद दी जा रही है। अब तक 1,490 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है, जिनमें से 1,272 मामलों में सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
प्रदेश के ये जिले हैं बाढ़ से प्रभावित
प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।
बाढ़ का दबाव कायम है, लेकिन सरकार ने राहत मशीनरी को पूरी ताकत से मैदान में उतार दिया है। अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में इसी रफ्तार को बनाए रखना और हर जरूरतमंद तक समय पर मदद पहुंचाना है।






