
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 12 सितंबर 2026:
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सियासत को झटका देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लंबे समय तक ओएसडी रहे चंदन जीना के यहां कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरों के बाद उठे राजनीतिक सवालों के बीच रावत ने कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण पदों से हटने का ऐलान कर दिया है। रावत ने साफ किया कि बरामदगी और उससे जुड़े आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी लेकिन कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई को अपनी वजह से कमजोर नहीं होने देना चाहते।
हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट के जरिए खुद को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से अलग करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि चंदन जीना लंबे समय तक उनके ओएसडी रहे और पार्टी तथा सरकार में उनके कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। रावत ने उन्हें विनम्र, सज्जन और काम करने वाला व्यक्ति बताते हुए कहा कि यदि ग्राम सेवक भर्ती की ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या किसी अन्य अनियमितता के प्रमाण सामने आते हैं तो वह ऐसे कृत्य के लिए लज्जित होंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है।
कांग्रेस नेता ने अपने फैसले को राजनीतिक रूप से भी अहम संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के आगामी चुनाव में बड़े राजनीतिक दांव लगे हैं। अपने पुराने अंदाज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह मजाक में कहा करते थे कि जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी तभी चुनाव होने वाले समझिए। इस बार उनके दरवाजे के बजाय उनके एक सहयोगी के घर दस्तक देकर एक राजनीतिक कथा गढ़ने का प्रयास किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रही है। ऐसे समय में उनके किसी भी कृत्य से पार्टी की लड़ाई कमजोर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी सरकारी पद पर नहीं हैं इसलिए सरकारी पद से इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता।
भर्ती विवाद पर रावत ने मांगी माफी
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जुड़े पुराने विवादों पर रावत ने अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि आयोग का गठन प्रदेश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुईं।
रावत ने कहा कि यदि नियुक्तियों की प्रक्रिया में उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है तो वह प्रदेश के लोगों से क्षमा मांगते हैं। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए लिया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति भविष्य में क्या करेगा, यह पहले से नहीं जाना जा सकता।
‘प्रमाण हैं तो जांच एजेंसियों को दें’
रावत ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि भर्ती और नियुक्तियों में उनकी संलिप्तता के प्रमाण किसी के पास हैं तो उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि बड़े दायित्व संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भ्रष्टाचार के प्रलोभन से बचना चाहिए और यदि उनसे ऐसी कोई चूक हुई है जिससे प्रदेश के युवाओं को नुकसान पहुंचा है तो कानून उन्हें दंडित करे।
अब पूरे मामले में निगाह जांच की दिशा पर है। कथित बरामदगी, भर्ती अनियमितताओं और उससे जुड़े राजनीतिक आरोपों की जांच में सामने आने वाले तथ्य ही यह तय करेंगे कि यह मामला केवल चुनावी राजनीति तक सीमित रहता है या फिर कार्रवाई का दायरा और बढ़ता है।






