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किराए का घर या दुकान? UP में बदला रेंट एग्रीमेंट का पूरा हिसाब, 10 लाख रुपये तक के सालाना किराए पर सिर्फ 4,500

सर्किल रेट के झंझट से राहत, अब सालाना किराए के हिसाब से तय होगा शुल्क, 2 लाख तक 1,000 और 6 लाख तक 3,000 रुपये

लखनऊ, 16 सितंबर 2026:

यूपी में मकान, दुकान या गोदाम किराए पर लेने-देने वालों के लिए किरायेदारी का गणित अब आसान होने जा रहा है। योगी कैबिनेट की बैठक में 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायेदारी और पट्टा विलेखों पर स्टांप शुल्क एवं पंजीयन फीस की व्यवस्था को सरल और किफायती बनाने का फैसला किया गया है।

जटिल हिसाब-किताब से मिल सकेगी राहत

अब किरायेदारों और मकान मालिकों को शुल्क की गणना के लिए संपत्ति के सर्किल रेट के जटिल हिसाब-किताब से काफी हद तक राहत मिलेगी। नई व्यवस्था में सालाना किराये की राशि के आधार पर निर्धारित शुल्क तय किया गया है। इससे रेंट एग्रीमेंट और उसके पंजीयन की लागत पहले से अधिक स्पष्ट और अनुमानित होगी।

स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल के मुताबिक पहले मकान, दुकान या गोदाम किराये पर देने अथवा लेने की स्थिति में स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी। इसके चलते किरायानामा तैयार कराने और पंजीयन कराने में लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता था। नई व्यवस्था का उद्देश्य इस प्रक्रिया को आसान बनाना और किरायेदारी समझौतों के पंजीकरण को प्रोत्साहित करना है।

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नई शुल्क व्यवस्था में सालाना किराये के तीन प्रमुख स्लैब तय किए गए हैं। दो लाख रुपये तक के सालाना किराये पर 1,000 रुपये, छह लाख रुपये तक के किराये पर 3,000 रुपये और 10 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर 4,500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
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यानी अब किरायेदार हो या मकान मालिक, रेंट एग्रीमेंट के लिए लगने वाले शुल्क का अनुमान पहले से लगाया जा सकेगा। सरकार के इस बदलाव से खासकर किराए के मकान में रहने वाले परिवारों, छोटे कारोबारियों और दुकानदारों को किरायेदारी दस्तावेजों को औपचारिक रूप से पंजीकृत कराने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। विस्तृत शुल्क संरचना में किरायेदारी की अवधि के अनुसार अलग-अलग दरें भी लागू हो सकती हैं।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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