आठ दशक पुरानी किशाऊ बांध परियोजना को मिली रफ्तार, MOU पर उत्तराखंड-यूपी के सीएम ने किए साइन
सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई बैठक, छह राज्यों को मिलेगा लाभ, परियोजना से बनेगा विशाल जलाशय व विद्युत उत्पादन क्षमता होगी विकसित, यमुना का भी होगा उद्धार

देहरादून, 16 सितंबर 2026ः
आठ दशक से लंबित किशाऊ बांध परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो गया है। सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में आयोजित बैठक में वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित इस परियोजना के लिए हुआ यह समझौता जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक व निर्णायक कदम है। इस परियोजन का फायदा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली को मिलेगा।
1940 में की गई थी परियोजना की परिकल्पना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इतने लंबे समय में परियोजना को आगे बढ़ाने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। आज पीएम मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आठ दशकों से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में बढ़ाया गया यह एक ऐतिहासिक कदम है। कहा कि परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद केंद्र एवं सहभागी राज्य सरकारों के बीच निरंतर समन्वय से परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई और MoU पर हस्ताक्षर के साथ इसे औपचारिक रूप दिया गया है।

राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना
सीएम धामी ने कहा कि किशाऊ कोई सामान्य बांध परियोजना नहीं है, बल्कि यह जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना है। उन्होंने कहा कि परियोजना से लगभग 1562 MCM क्षमता का विशाल जलाशय बनेगा और 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होगी। इसका लाभ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पूरे अपर यमुना बेसिन को मिलेगा। कहा कि किशाऊ परियोजना केवल एक राज्य या क्षेत्र की परियोजना नहीं है, बल्कि यह अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता
सीएम ने कहा कि परियोजना के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी सामने आएंगी। परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील व सम्मानजनक पुनर्वास उत्तराखंड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है और राज्य सरकार इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी।
क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि उपलब्ध कराना चुनौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए लगभग 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके कारण क्षतिपूरक वनीकरण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे वनाच्छादित और पर्वतीय राज्य के लिए इतनी बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार और सभी सहभागी राज्यों से अनुरोध किया कि क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिह्नित करने में उत्तराखंड को सहयोग प्रदान किया जाए। कहा कि परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय व वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में हुआ MoU हस्ताक्षर केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ऐसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत का ऐतिहासिक पड़ाव है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा। कहा कि किशाऊ परियोजना के क्रियान्वित होने से जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवीकरण को नई गति मिलेगी तथा अपर यमुना बेसिन के राज्यों के विकास को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, राजस्थान के सीएम भजन लाल शर्मा, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित केंद्र व सहभागी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






