
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 31 अगस्त 2026ः
उत्तराखंड में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में निर्वाचन विभाग ने बड़ी प्रगति दर्ज की है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में अनमैप्ड और विसंगति वाले 24 लाख 30 हजार मतदाताओं को जारी नोटिस में से करीब 23 लाख मामलों की सुनवाई पूरी कर ली गई है। यानी कि करीब 94 प्रतिशत मामलों का निस्तारण सुनवाई के स्तर पर हो चुका है। शेष मतदाताओं में करीब 1.10 लाख ऐसे हैं, जो किसी कारण सुनवाई में शामिल नहीं हो सके। निर्वाचन विभाग ने इन्हें अपना पक्ष रखने के लिए दोबारा अवसर देने का निर्णय लिया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सोमवार को सभी डीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसआईआर की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 के मामलों को अगले एक सप्ताह में सुनवाई पूरी कर निस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
71.33 लाख मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 71 लाख 33 हजार मतदाता शामिल हैं। इनमें अनमैप्ड और मतदाता विवरण में विसंगति से संबंधित 24 लाख 30 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। अब तक 23 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है। निर्वाचन विभाग के मुताबिक करीब 1.10 लाख मतदाता ऐसे हैं, जो नोटिस मिलने के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो सके। विभाग ने ऐसे मतदाताओं को दोबारा सुनवाई का अवसर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता केवल प्रक्रिया संबंधी कारणों से मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

दावे-आपत्तियों के निस्तारण पर दिया जोर
समीक्षा बैठक में सभी डीएम ने अपने-अपने जिलों में दावे और आपत्तियों के निस्तारण की स्थिति बताई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से फार्म-6, 7 और 8 के लंबित मामलों की विस्तृत जानकारी ली और उन्हें समय से निस्तारित करने के निर्देश दिए। डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक दावे और आपत्ति की सुनवाई हो व पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि एसआईआर से जुड़े सभी कार्यों की नियमित निगरानी की जाए व निर्धारित समयसीमा में लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जाए।






