Uttarakhand

13 जिलों में एक साथ बजेगा अलर्ट : मॉक ड्रिल से परखी जाएगी उत्तराखंड की मानसून तैयारी

दो जुलाई को करीब 70 जगहों पर होगी मॉकड्रिल, राहत शिविरों से लेकर हेली रेस्क्यू तक के हालात बनाए जाएंगे, टेबल टॉप एक्सरसाइज में विभागों के संसाधनों और तैयारियों की होगी समीक्षा, पूर्व सैनिकों, आपदा मित्रों, एनसीसी, एनएसएस और स्वयंसेवी संगठनों की भी रहेगी भागीदारी

देहरादून, 19 जून 2026:

उत्तराखंड में मानसून सीजन से पहले आपदा प्रबंधन व्यवस्था की असली परीक्षा 2 जुलाई को होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य के सभी 13 जिलों में एक साथ बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल कराई जाएगी। इसका मकसद बाढ़, जलभराव, भूस्खलन समेत मानसून के दौरान आने वाली आपदाओं से निपटने के लिए विभागों की तैयारियों और आपसी तालमेल को परखना है।

मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में ओरिएंटेशन और कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें सभी जिलों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस बार राज्यभर में करीब 70 नए स्थानों को चुना गया है। जहां पहले अभ्यास हो चुका है, वहां दोबारा मॉक ड्रिल नहीं कराई जाएगी।
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उन्होंने बताया कि 30 जून को टेबल टॉप एक्सरसाइज होगी, जिसमें सभी जिले अपनी तैयारियों, उपलब्ध संसाधनों, उनकी तैनाती और मॉक ड्रिल की योजना का ब्यौरा देंगे। इसके बाद 2 जुलाई को जमीनी स्तर पर अभ्यास कराया जाएगा। पूरी प्रक्रिया आईआरएस यानी घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के तहत संचालित होगी।

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने एटीआई नैनीताल से आपदा प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके कर्मचारियों का डाटा बेस तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रथम प्रतिक्रियादाता के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने प्रस्तुतीकरण के जरिए मॉक ड्रिल और टेबल टॉप अभ्यास की रूपरेखा समझाई। बैठक में संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, आरटीओ देहरादून डॉ. अनीता चमोला, अरुण कुमार पांडे और शांतनु सरकार भी मौजूद रहे।

राहत शिविरों की व्यवस्था भी टेस्ट होगी

मॉक ड्रिल के दौरान राहत शिविर स्थापित कर बिजली, पानी, भोजन, प्राथमिक उपचार, शिशु आहार और गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधाओं की व्यवस्था को रियल टाइम में परखा जाएगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवान भी तैनात किए जाएंगे।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर रहेगा जोर

विनोद कुमार सुमन ने बताया कि आपदा के समय सबसे पहले स्थानीय लोग ही मदद के लिए आगे आते हैं। इसी वजह से इस बार मॉक ड्रिल में पूर्व सैनिकों, पूर्व सीएपीएफ जवानों, आपदा मित्रों, एनजीओ, एनसीसी, एनएसएस, रेड क्रॉस और दूसरे स्वयंसेवी समूहों को भी शामिल किया जाएगा।

आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी लगेगी

टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग समेत कई एजेंसियां अपने आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की प्रदर्शनी लगाएंगी। इसमें खोज एवं बचाव उपकरण, संचार प्रणाली और आपदा प्रतिक्रिया वाहनों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

जलभराव से हेली रेस्क्यू तक के हालात बनाकर होगा अभ्यास

मॉक ड्रिल में रिहायशी इलाकों में जलभराव, तटबंधों पर खतरा, स्कूलों से बच्चों की सुरक्षित निकासी, भूस्खलन से सड़क बंद होने, कट-ऑफ क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने, जल विद्युत परियोजनाओं से पानी छोड़े जाने पर अलर्ट जारी करने और छतों पर फंसे लोगों के हेली रेस्क्यू जैसे परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जाएगा।

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