
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 20 अगस्त 2026ः
उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। नर्सिंग एकता मंच और उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने 25 जुलाई को हुई लिखित परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले और बाद में कथित लेन-देन से जुड़े मामले सामने आए हैं। नर्सिंग भर्ती के नाम पर कथित तौर पर 32 लाख रुपए मांगने संबंधी मामला सामने आने से परीक्षा की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ गई है।
बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल व नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि नर्सिंग अभ्यर्थी लंबे समय से वर्षवार भर्ती सहित अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार और विभागीय अधिकारियों की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था, इसके बावजूद 25 जुलाई को लिखित परीक्षा करा दी गई। दोनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जुलाई में परीक्षा की तारीख तय होने के बाद आरोपी चारू चंद्र जोशी ने कथित तौर पर एक नर्सिंग अभ्यर्थी से डीजी हेल्थ कार्यालय में अधिकारियों से उसकी अच्छी पहचान बताकर चयन के लिए 32 लाख रुपये की मांग की। इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा चुकी है।
पीड़िता की तहरीर के हवाले से उन्होंने दावा किया कि तीन जुलाई से एक अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से कई नामों पर रकम भेजी गई। इनमें देवांश सुशील तिवारी, मोहन चंद्र मिश्रा, स्किल्सक्रिल इंफो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड कलेक्शन अकाउंट, धीरज कुमार बेलवाल, पूजा चौहान, तरुण कुमार, गणेश जनरल स्टोर और विनोद नाथ समेत अन्य नाम बताए गए हैं।
आरोप है कि पीड़िता ने अपनी शादी के लिए जमा पैसा और सोना गिरवी रखकर करीब 15 लाख रुपये नकद भी चारू चंद्र जोशी को दिए। इन आरोपों की सत्यता की जांच स्वतंत्र एजेंसी अथवा एसआईटी से कराई जानी चाहिए। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। नर्सिंग एकता मंच और उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने मामले में तीन दिन के अंदर कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इस अवसर पर बेरोजगार संघ के प्रदेश प्रवक्ता नितिन, राजेंद्र कुकरेती, प्रवेश रावत, उपेंद्र, मुकेश रमोला, जतिन और अवधेश मौजूद रहे।






