
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 18 सितंबर 2026ः
उत्तराखंड में प्रस्तावित 1320 मेगावाट थर्मल पावर की दीर्घकालिक बिजली खरीद को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ओर से उठाए गए सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की बढ़ती और दीर्घकालिक बिजली जरूरत को सुरक्षित करना है।
मॉडल बिडिंग डाक्युमेंट में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव
प्रमुख सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से वर्ष 2019 में जारी Model Bidding Document एक सामान्य मॉडल दस्तावेज है। प्रत्येक बिजली परियोजना की तकनीक, स्थान, ईंधन की उपलब्धता, परिवहन लागत और अन्य परिस्थितियां अलग होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए निविदा प्रक्रिया के दौरान बोलीदाताओं से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं व्यावहारिक परीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि आवश्यक बदलावों के प्रस्ताव उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखे गए। आयोग ने विचार-विमर्श के बाद संबंधित संशोधनों को मंजूरी दी, जिसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
रीक्वेस्ट फॉर क्वोटेशन में पांच कंपनियां योग्य
डॉ. सुंदरम ने बताया कि बिजली खरीद का कार्य किसी एक कंपनी को बिना प्रतिस्पर्धा के देने की धारणा सही नहीं है। Request for Quotation (RFQ) चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई हैं। इसके बाद Request for Proposal (RFP) चरण में भी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के दौरान प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में किसी एक कंपनी को पहले से लाभ पहुंचाने का प्रश्न नहीं उठता।
राज्य की जरूरत के हिसाब से की गई प्रस्तावित
प्रमुख सचिव के मुताबिक 1320 मेगावाट बिजली की व्यवस्था राज्य की दीर्घकालिक बेस-लोड आवश्यकता को ध्यान में रखकर प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में उपभोक्ताओं को पर्याप्त, निरंतर और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है। राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकता का आकलन Central Electricity Authority (CEA) की Resource Adequacy Study के आधार पर किया गया है। उन्होंने बताया कि 25 वर्षों की अवधि में संभावित कुल भुगतान करीब 1.60 से 1.66 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। यह किसी एकमुश्त भुगतान की राशि नहीं है। वास्तविक भुगतान अंतिम टैरिफ, बिजली की वास्तविक आपूर्ति, संयंत्र की उपलब्धता और अनुबंध की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।
देश में कहीं भी संयंत्र लगाने का विकल्प
प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य भी है। थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की आवश्यकता होती है। लंबी दूरी से कोयला लाने पर परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसलिए निविदा में संयंत्र को देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में संयंत्र लगाने पर कोई रोक नहीं है।






