
एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 24 सितंबर 2026:
यूपी के लखनऊ जिले के सिसेंडी के जबरेला गांव में एक परिवार ने एक ही दिन जिंदगी के दो बिल्कुल अलग रंग देखे। गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान सई नदी में डूबने से हरिप्रसाद की मौत हुई थी। जिस दिन शाम को उनका अंतिम संस्कार किया गया, उसी रात करीब 12 बजे उनकी पत्नी श्यामवती ने एक बेटी को जन्म दिया। पर्व, नदी,मौत और नए जन्म से जुड़ा सच जिसने भी जाना पल भर को व्यथित हो गया।
दोपहर में उठी पिता की अर्थी, प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती थी पत्नी
गणेश विसर्जन के दौरान जबरेला के पास सई नदी में तीन युवक डूब गए थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई थी। पुलिस के साथ ग्रामीणों ने बचाव की कोशिश शुरू की। हादसे में हरिप्रसाद की जान चली गई। उनकी मौत की खबर से गांव में मातम छा गया। दोपहर में परिवार और ग्रामीण हरिप्रसाद की अंतिम यात्रा लेकर निकले। भारी मन से उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसी दौरान उनकी गर्भवती पत्नी श्यामवती मोहनलालगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती थीं।

शाम को चिता जली, रात में बेटी ने जन्म लिया
हरिप्रसाद का अंतिम संस्कार होने के कुछ घंटे बाद रात करीब 12 बजे श्यामवती ने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। परिवार के लिए यह पल खुशी लेकर आया, लेकिन उसी खुशी के साथ हरिप्रसाद के चले जाने का गम भी जुड़ा था। जिस समय परिवार हरिप्रसाद को अंतिम विदाई देकर गम में डूबा था, उसी दौरान अस्पताल में नवजात की पहली किलकारी गूंजी। बेटी के जन्म से परिवार खुश तो हुआ लेकिन मौत के गम ने किसी जश्न पर पानी फेर दिया। सब यही सोच रहे थे हरिप्रसाद जिंदा होता तो घर में लक्ष्मी आने पर कितना खुश होता।
नवजात को गोद में लेकर निहारती रही श्यामवती, परिवार के सामने जीविका का भी संकट
हरिप्रसाद के परिवार में पहले से 12 साल का बेटा है। उनकी 10 साल की बेटी निहालिका भी है। अब परिवार में एक और बेटी आई है। श्यामवती के लिए पति की मौत और बेटी के जन्म का यह समय बेहद भावुक रहा। गोद में नवजात को निहारती हुई श्यामवती पति की याद कर सिसकती भी रही। हरिप्रसाद मजदूरी के सहारे परिवार की जीविका चलाता था। अब उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक परेशानियों की चिंता भी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने परिवार को ढांढस बंधाया है और प्रशासन से आर्थिक मदद दिलाने की मांग की है।






