
सीतापुर, 29 सितंबर 2026:
Sitapur Bank Fraud : यूपी के सीतापुर में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की मंडी समिति शाखा में ऋण वितरण से जुड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बैंक के मुख्य प्रबंधक राजीव वर्मा ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक दीपक कुमार समेत 17 खाताधारकों पर एफआईआर दर्ज करवाई है। मैनेजर व खाताधारकों ने मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 44.28 लाख रुपये के ऋण का गबन किया है। बैंक की जांच में कई ऋण खातों से जुड़ी परियोजनाएं मौके पर नहीं मिलीं। अब पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर राज उगलवाएगी।
जांच में सामने आईं ऋण खातों में गड़बड़ियां
Bank Loan Fraud : बैंक के मुताबिक तत्कालीन Branch Manager दीपक कुमार के कार्यकाल में अलग-अलग योजनाओं के तहत कई Loan Accounts स्वीकृत किए गए थे। बाद में इनकी समीक्षा और स्थल निरीक्षण कराया गया। जांच में कुछ मामलों में फर्जी कोटेशन, बिल-वाउचर, गलत बैंक डिटेल्स, परियोजना स्थल पर यूनिट नहीं होने और ऋण राशि के इस्तेमाल में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई। ऋण खातों में वर्तमान में 22,51,748.38 रुपये का Term Loan और 21,76,788.87 रुपये का Cash Credit बकाया है। कुल रकम 44,28,537.25 रुपये बताई गई है।
बैंक मैनेजर पर मिलीभगत कर नियम तोड़ने का आरोप
तत्कालीन शाखा प्रबंधक दीपक कुमार ने बैंक के नियमों के बावजूद दस्तावेजों का सही सत्यापन नहीं किया। बैंक के मुताबिक ऋण की रकम सीधे सामग्री विक्रेता के खाते में जानी चाहिए थी, लेकिन कुछ मामलों में रकम नकद निकालने की अनुमति दी गई। बैंक का आरोप है कि खाताधारकों के साथ मिलकर फर्जी कोटेशन और बिल के आधार पर ऋण स्वीकृत व वितरित किए गए।
शिवेंद्र सिंह के घर पर मिला जनरल स्टोर
शिवेंद्र सिंह के खाते में अवध मशीनरी कंपनी के नाम से 3,11,520 रुपये का कोटेशन और उतनी ही रकम का बिल लगाया गया था। बैंक के मुताबिक Term Loan और Cash Credit की रकम बचत खाते के जरिये नकद निकाली गई। स्थल निरीक्षण में संबंधित परियोजना नहीं मिली। खाताधारक अपने घर पर किराना/जनरल स्टोर चलाते मिले। संबंधित फर्म के मालिक ने कोटेशन और बिल को फर्जी बताया।
गंगा राम के नाम पर फर्म ही नहीं मिली
गंगा राम रस्तोगी के दो ऋण खातों की जांच में KHUSHI ENTERPRISES के नाम से दो-दो लाख रुपये के कोटेशन मिले। बैंक की टीम जब बताए गए पते पर पहुंची तो वहां ऐसी कोई फर्म नहीं मिली। कोटेशन पर दर्ज TIN नंबर भी संबंधित पोर्टल पर उपलब्ध नहीं मिला। मशीनरी का बिल भी बैंक को नहीं दिया गया। स्थल निरीक्षण में परियोजना से जुड़ी कोई पहचान या यूनिट नहीं मिली। जांच के मुताबिक ऋण राशि में से 10 हजार रुपये की Fixed Deposit बनाई गई थी, जबकि 4,140 रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया गया था।
ब्यूटी पार्लर के नाम पर लिया लोन, यूनिट नहीं मिली
आशु दीक्षित के खाते में 2.75 लाख रुपये से ज्यादा का Term Loan RTGS के जरिये तीन अलग-अलग कोटेशन में दी गई बैंक डिटेल्स पर भेजा गया। इसके बाद बिल-वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए। बैंक की टीम को मौके पर ब्यूटी पार्लर नहीं मिला। आसपास के लोगों से पूछताछ में भी कभी वहां ब्यूटी पार्लर संचालित होने की जानकारी नहीं मिली।
रूप प्रकाश के खाते में परियोजना की जगह जूस की दुकान
रूप प्रकाश के खाते में मिश्रिख रेफ्रीजरेशन के नाम से 2.85 लाख रुपये का कोटेशन लगाया गया था, लेकिन उससे जुड़ा बिल-वाउचर नहीं मिला। स्थल निरीक्षण में परियोजना नहीं मिली। जांच के दौरान वह अपने भाई अजय प्रकाश के साथ लालबाग चौराहा स्थित गन्ने के जूस की दुकान चलाते पाए गए।
अमन दीक्षित ने RTGS से रकम भेजी, परियोजना नहीं मिली
अमन दीक्षित के मामले में 39 हजार रुपये अंशदान के तौर पर जमा किए जाने की बात दर्ज है। Term Loan की 2.70 लाख रुपये की रकम RTGS/NEFT से ऋण पत्रावली में लगे कोटेशन के खातों में भेजी गई। इसके बावजूद बिल-वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए। स्थल निरीक्षण में परियोजना का कोई नाम या तख्ती नहीं मिली।
किशोरी के खाते में दूसरे व्यक्ति की बैंक डिटेल
किशोरी के मामले में 2.70 लाख रुपये का Term Loan RTGS के जरिये उस बैंक खाते में भेजा गया, जिसकी डिटेल कोटेशन में दी गई थी। बैंक का दावा है कि खाता फर्म के नाम पर नहीं बल्कि शोहित मोदी नाम के व्यक्ति के नाम था। अवध मशीनरी कंपनी के नाम से तीन लाख रुपये का कोटेशन लगाया गया, लेकिन बिल-वाउचर नहीं मिला। जांच टीम ने संबंधित फर्म से संपर्क किया तो उसके मालिक ने कोटेशन को फर्जी बताया। बैंक के मुताबिक उन्होंने कोटेशन में दी गई बैंक डिटेल्स और शोहित मोदी नाम के व्यक्ति को पहचानने से भी इनकार किया।
अमित कुमार के मामले में रकम वापस होने की बात
अमित कुमार मौर्या के ऋण खाते में अर्श ट्रेडिंग कंपनी के नाम से 2,91,872 रुपये का कोटेशन था। 2.85 लाख रुपये RTGS से फर्म के खाते में भेजे गए। बैंक के मुताबिक फर्म के मालिक ने भुगतान मिलने की पुष्टि की, लेकिन बाद में खाताधारक के अनुरोध पर पूरी रकम उसके दूसरे बैंक खाते में वापस कर दी गई। स्थल निरीक्षण में परियोजना नहीं मिली।
राजकुमार के खाते में भैंसों के रवन्ना बिल
राजकुमार के ऋण खाते में पशु बाजार बड़ा गांव, थाना मसौली, बाराबंकी के पांच रवन्ना बिल लगाए गए थे। इनकी कुल रकम 2.85 लाख रुपये थी और वे लाइव स्टॉक यानी भैंसों से जुड़े थे। बैंक के मुताबिक डेयरी प्रोजेक्ट के लिए जरूरी मशीनरी या उपकरण का कोई कोटेशन अथवा बिल नहीं मिला। स्थल निरीक्षण में संबंधित डेयरी यूनिट नहीं मिली। घर पर सिर्फ दो भैंसें मिलीं।
विजेता ने बताया, लोन की रकम दूसरे काम में लगाई
विजेता रस्तोगी के खाते में इमरान सूट सेंटर और मुस्कान इंटरप्राइजेज के नाम से स्टॉक व मशीनरी के दस्तावेज लगाए गए थे। बैंक की जांच में परियोजना मौके पर नहीं मिली। खाताधारक ने पूछताछ में बताया कि ऋण की रकम उस मकान को छुड़ाने में खर्च की गई जिसे गिरवी रखा गया था। कोटेशन और बिल-वाउचर उसके पति ने बनवाए थे, ऐसा भी उसने जांच में बताया।
सूरज इंटरप्राइजेज में रकम गई, मशीनरी का पता नहीं
शीला मौर्या के खाते में 2,85,060 रुपये सूरज इंटरप्राइजेज को तीन बार RTGS किए गए। बैंक को सात बिल-वाउचर मिले, लेकिन वे केवल स्टॉक से जुड़े थे। मशीनरी या उपकरण का कोई कोटेशन या बिल नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि जिस सूरज इंटरप्राइजेज को रकम भेजी गई, वह खाताधारक के बेटे सूरज के नाम से रजिस्टर्ड है। बैंक के मुताबिक परियोजना स्थल पर यूनिट नहीं मिली।
बबली के लोन में कॉस्मेटिक्स का कोटेशन
बबली के खाते में रेडीमेड गारमेंट्स उत्पादन के लिए ऋण स्वीकृत किया गया था। जांच में उषा कॉस्मेटिक्स के नाम से एक लाख रुपये का कोटेशन मिला। निखिल मैचिंग सेंटर से 69,730 रुपये के स्टॉक और अभिषेक स्विंग मशीन से 1,00,300 रुपये की मशीनरी का कोटेशन लगाया गया था। बैंक के मुताबिक दस्तावेजों के बावजूद संबंधित परियोजना मौके पर नहीं मिली और बिल-वाउचर भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
मधुर मिश्रा के मामले में यूनिट का कोई रिकॉर्ड नहीं
मधुर मिश्रा के खाते में 2,85,277 रुपये का Term Loan RTGS के जरिये कोटेशन में दी गई बैंक डिटेल्स पर भेजा गया। Cash Credit की रकम नकद निकाली गई। स्थल निरीक्षण में न साइन बोर्ड मिला, न स्टॉक, फर्नीचर, बिल की रसीद या परियोजना शुरू होने की तारीख से जुड़ी फोटो। बैंक ने जांच में परियोजना कभी स्थापित नहीं होने का आरोप लगाया है।
44.28 लाख रुपये के गबन का आरोप
जांच और स्थल निरीक्षण के दौरान स्वीकृत सामग्री, मशीनरी या संबंधित परियोजनाएं मौके पर नहीं मिलीं। बैंक ने कुल 44,28,537.25 रुपये की रकम के गबन, आपराधिक न्यासभंग और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। मुख्य प्रबंधक राजीव वर्मा ने कोतवाली नगर पुलिस से तत्कालीन शाखा प्रबंधक दीपक कुमार, संबंधित खाताधारकों और उनके सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है।






