Navratri 2026: कल से घर-घर विराजेंगी देवी मां, 10 दिन तक होगी पूजा, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
50 साल में छठी बार अष्टमी तिथि दो दिन रहने से बढ़ी नवरात्र की अवधि, 20 अक्टूबर को मनेगा विजयादशमी पर्व, घटस्थापना के लिए सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ समय

लखनऊ, 10 अक्टूबर 2026:
शारदीय नवरात्र की शुरुआत कल (11 अक्टूबर) से हो रही है। इस बार नवरात्र में तिथियों के विशेष संयोग के चलते पर्व नौ नहीं बल्कि 10 दिनों तक मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक बीते 50 वर्षों में ऐसा संयोग छठी बार बन रहा है। अष्टमी तिथि दो दिन तक रहने के कारण नवरात्र की अवधि एक दिन बढ़ गई है। इस दौरान घरों से लेकर मंदिरों तक देवी मां की आराधना होगी और भक्त विधि-विधान से कलश स्थापना कर नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे। वहीं, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
अष्टमी तिथि ने बढ़ाई नवरात्र की अवधि
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार तिथियों की विशेष स्थिति के चलते नवरात्र की अवधि में बदलाव हुआ है। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को पूरे दिन रहने के बाद 19 अक्टूबर की सुबह 7:53 बजे तक व्याप्त रहेगी। इसी वजह से नवरात्र का पर्व 10 दिनों तक चलेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जब कोई तिथि दो सूर्योदय तक रहती है तो उदया तिथि के आधार पर उसकी गणना विशेष तरीके से की जाती है।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। हालांकि, उदया तिथि की मान्यता के अनुसार नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर को ही माना जाएगा। इसी दिन से देवी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि की शुरुआत होगी।
हाथी पर होगा मां का आगमन
इस बार नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर और प्रस्थान मुर्गे पर होने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्र की शुरुआत रविवार को होने के कारण देवी के आगमन का वाहन हाथी माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहनों को विशेष महत्व दिया जाता है।

कलश स्थापना के लिए 3 घंटे 53 मिनट का समय
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग बन रहा है। ऐसे में कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को विशेष रूप से शुभ बताया गया है। घटस्थापना का सुबह का शुभ मुहूर्त 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इस तरह भक्तों को कलश स्थापना के लिए 3 घंटे 53 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।
नवरात्र में कलश स्थापना को देवी आराधना का महत्वपूर्ण आरंभ माना जाता है। भक्त घरों में पूजा स्थल तैयार कर कलश स्थापित करेंगे और नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।






