‘राम ने यादव को मारा’, पिता ‘बीकॉम’! UP की वोटर लिस्ट को लेकर संजय सिंह का चुनाव आयोग पर तीखा हमला
आप सांसद ने लगाया सूची में घोटाले और मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने की साजिश का आरोप, बोले- भाजपा एजेंटों से निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसी?, गोरखपुर एमएलसी चुनाव की मतगणना से दागी पर्यवेक्षक को हटाने की मांग

लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026:
आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यूपी की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने और चुनाव आयोग के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर भाजपा और निर्वाचन अधिकारियों पर तीखा हमला बोला। सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियां सामने आने के बावजूद चुनाव आयोग जवाबदेही तय करने के बजाय बेतुके तर्क दे रहा है। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और मतदाता सूची की तत्काल जांच की मांग की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कथित जवाब पर आपत्ति जताई
संजय सिंह ने मतदाता सूची में दर्ज कथित त्रुटियों के उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ नामों और पिता के नामों का अनुवाद इस कदर बिगड़ गया है कि पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने ‘राम ने यादव को मारा’, ‘टक्कर मारना’ और ‘नरेंद्र यादव’ के पिता के रूप में ‘बी कॉम’ दर्ज होने जैसे उदाहरण गिनाए। उनके मुताबिक मोहम्मद इकबाल बेग का नाम भी कथित तौर पर बदलकर ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ कर दिया गया। आप सांसद ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के कथित जवाब पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाब में इस्तेमाल की गई भाषा सांप्रदायिक मानसिकता दर्शाती है।

संजय सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने पीलीभीत, तरबगंज, जहानाबाद और बिसवां समेत विभिन्न क्षेत्रों के आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि कई आवेदनों में हटाने के लिए प्रस्तावित नामों में 87 से 95 प्रतिशत तक मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल थे।
उन्होंने पीलीभीत में 13 हजार समान ईपीआईसी नंबर, बस्ती में सात हजार संदिग्ध मतदाता और सुल्तानपुर में एक व्यक्ति द्वारा 26 कथित फर्जी फॉर्म भरे जाने का मामला भी उठाया। संजय सिंह ने सवाल किया कि जब वरिष्ठ नेताओं और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मामूली विसंगतियों पर नोटिस भेजे जा रहे हैं तो मतदाता सूची की गंभीर त्रुटियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
गोरखपुर एमएलसी मतगणना और लखनऊ हत्याकांड पर भी हमला
आप सांसद ने गोरखपुर क्षेत्र के एमएलसी चुनाव की मतगणना के लिए अभय सिंह को पर्यवेक्षक बनाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अभय सिंह खनन माफिया से रिश्वत लेने के मामले में सीबीआई जांच के दायरे में हैं। संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त और यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मतगणना से पहले उन्हें हटाने की मांग की।
यूपी के चुनाव आयोग में भाजपा का एजेंट बैठा है, सांप्रदायिक मानसिकता के व्यक्ति के रहते निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं!
➤ यूपी में 13 लाख भाजपाइयों के नाम जोड़ दिए गए और 85 हजार आम नागरिकों के नाम काट दिए गए।
➤ पीलीभीत, बिसवां, तरबगंज और जहानाबाद में एक-एक बूथ पर 90-95% तक मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटे गए।
➤ पीलीभीत में 13 हजार नामों के EPIC नंबर एक जैसे पाए गए और नाम बदल दिए गए।
➤ सवाल पूछने पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सांप्रदायिकता से भरा आपत्तिजनक जवाब दिया।
➤ ऐसे अधिकारी के रहते निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
-@SanjayAzadSln, राज्यसभा सांसद, AAP
— AAP (@AamAadmiParty) October 26, 2026
प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर निशाना साधते हुए उन्होंने लखनऊ के सआदतगंज में जमीन विवाद के बाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी में दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने सरकार के अपराध नियंत्रण संबंधी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संजय सिंह ने मांग की कि मतदाता सूची की कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो, चुनाव प्रक्रिया से विवादित अधिकारियों को हटाया जाए और लखनऊ हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी मतदाता सूची से जुड़ी गड़बड़ियों को लगातार उजागर करती रहेगी।






