रसोई गैस की सप्लाई पर संकट : 200 ट्रकों का चक्का जाम, ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से किल्लत के आसार
192 एजेंसियों तक सप्लाई का वादा कर 80 तक समेटा काम, नाराज ट्रांसपोर्टरों ने अमौसी प्लांट पर रोकी सिलेंडरों की उठान, बैंक की किस्त, डीजल और ड्राइवरों का वेतन निकालना भी हुआ मुश्किल

लखनऊ, 3 नवंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में इंडेन गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर संकट के बादल छा गए हैं। सरोजनीनगर इलाके में अमौसी स्थित इंडियन ऑयल के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में मंगलवार सुबह सिलेंडरों की उठान ठप हो गई। टेंडर की शर्तों के मुताबिक काम नहीं मिलने से नाराज 15 ट्रांसपोर्टरों ने अपने करीब 200 ट्रकों का चक्का जाम कर दिया है। इसका असर जिले की इंडेन गैस एजेंसियों तक होने वाली आपूर्ति पर पड़ने लगा है।
ट्रांसपोर्टरों ने दो टूक कहा है कि जब तक कंपनी की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक हड़ताल खत्म नहीं होगी। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक वर्ष 2023 में हुए टेंडर के तहत लखनऊ समेत बाराबंकी, अयोध्या, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और सीतापुर की 192 गैस एजेंसियों तक सिलेंडर पहुंचाने का काम देने का वादा किया गया था। इसके लिए 15 ट्रांसपोर्टरों ने 206 ट्रक लगाए थे।

आरोप है कि करीब एक साल पहले कंपनी ने काम घटाकर लखनऊ और बाराबंकी की महज 80 एजेंसियों तक सीमित कर दिया। इससे उनकी आमदनी आधे से भी कम रह गई। ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि टेंडर के समय हर ट्रक को हर महीने करीब 2.45 लाख रुपये का काम मिलने का भरोसा दिया गया था लेकिन अब 80 से 90 हजार रुपये का ही काम मिल रहा है। कई एजेंसियां दूसरे ट्रांसपोर्टरों को दिए जाने का भी आरोप है।

उनका कहना है कि एक ट्रक पर हर महीने करीब 50 हजार रुपये बैंक की किस्त, 15 हजार रुपये ड्राइवर का वेतन, 15 हजार रुपये लोडिंग-अनलोडिंग और 40 हजार रुपये डीजल पर खर्च होते हैं। ऐसे में कमाई से खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन, कंपनी के उच्च अधिकारियों, डीएम और जिलापूर्ति अधिकारी से कई बार गुहार लगाने के बावजूद समाधान नहीं निकला। अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। हड़ताल लंबी खिंची तो गैस सिलेंडरों की आपूर्ति और उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ सकती है।






