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जूनोटिक रोगों को लेकर बड़ा अलर्ट : इंसानों तक बीमारी पहुंचने से पहले होगी रोकथाम

75 जिलों के पशु चिकित्सक बनेंगे मास्टर ट्रेनर, रेबीज, बर्ड फ्लू, जापानी इंसेफेलाइटिस, लंपी स्किन डिजीज समेत कई गंभीर रोगों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण के लिए राज्य स्तरीय ट्रेनिंग, 'वन हेल्थ' मॉडल के तहत प्रदेश की तैयारियां होंगी और मजबूत

लखनऊ, 16 जुलाई 2026:

पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (जूनोटिक रोगों) और तेजी से उभर रहे नए पशु रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश का पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। इसी कड़ी में विभाग ने पशु चिकित्सकों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक होटल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) कार्यक्रम का आयोजन किया है। पहले दिन गुरुवार को प्रदेश के 40 जिलों से आए 80 सरकारी पशु चिकित्सकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन पशुपालन विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र कुमार पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सक किसी भी असामान्य पशु रोग की पहचान करने वाले पहले प्रमुख अधिकारी (फर्स्ट रिस्पांडर) होते हैं। ऐसे में रोगों की समय पर पहचान, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला जांच, निगरानी, रिपोर्टिंग, पशुपालकों को जागरूक करने और रोग प्रकोप पर नियंत्रण में उनकी भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण में सीखे गए ज्ञान को अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने और अपने-अपने जिलों में अन्य पशु चिकित्सकों व पैरावेट कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित करने का आह्वान किया।

दो दिवसीय प्रशिक्षण में आईवीआरआई, बीएचयू तथा आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनडीयूएटी), कुमारगंज (अयोध्या) के विशेषज्ञ तकनीकी सत्र ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान रेबीज, बर्ड फ्लू, लेप्टोस्पायरोसिस, जापानी इंसेफेलाइटिस, बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस, सीसीएचएफ, एन्थ्रेक्स, स्क्रब टाइफस, ग्लैंडर्स, लंपी स्किन डिजीज, ब्रुसेलोसिस, साल्मोनेलोसिस और डर्माटोफाइटोसिस जैसे महत्वपूर्ण रोगों की पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर जानकारी दी जा रही है।
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इसके अलावा रोग निगरानी, मानकीकृत केस परिभाषाएं, प्रयोगशाला जांच, जैव-सुरक्षा, नमूना संग्रह, पैकिंग एवं सुरक्षित परिवहन तथा रोग प्रकोप की जांच जैसे विषय भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दोनों चरणों में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के 150 सरकारी पशु चिकित्सकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है।

ये प्रशिक्षित चिकित्सक अब अपने-अपने जिलों में ‘मास्टर ट्रेनर’ की भूमिका निभाते हुए अन्य पशु चिकित्सकों और पैरावेट कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे प्रदेश में जूनोटिक रोगों और अन्य गंभीर पशु रोगों की निगरानी, रोकथाम तथा नियंत्रण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

विभाग का कहना है कि यह पहल ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिससे पशु और मानव स्वास्थ्य की संयुक्त सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कार्यक्रम में निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक, पशुपालन विभाग डॉ. संगीता तिवारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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