Uttarakhand

किसानों का दल हिमाचल प्रदेश रवाना, मंत्री बोले- जानेंगे सेब की बागवानी की हाइटेक तकनीक

गणेश जोशी ने हाथीबड़कला के कैंप कार्यालय से 28 अन्नदाताओं को हरी झंडी दिखाकर भेजा, पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटेंगे वापस, किसान अपने बागानों में इन तकनीकों का इस्तेमाल कर अन्य को भी करेंगे जागरूक

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 3 नवंबर 2026:

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सेब उत्पादन को नई ऊंचाई देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार आधुनिक बागवानी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने मंगलवार को हाथीबड़कला स्थित कैंप कार्यालय से देहरादून के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के 28 किसानों के दल को पांच दिवसीय प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश रवाना किया। किसान सोलन स्थित डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में सेब की अति सघन बागवानी की आधुनिक तकनीकें सीखेंगे।

पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने की कवायद

कृषि मंत्री जोशी ने किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सेब की उन्नत किस्मों के पौध रोपण, कटाई-छंटाई, उर्वरक प्रबंधन, जैविक खाद के उपयोग, बडिंग और ग्राफ्टिंग की तकनीकी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही फलों की तुड़ाई के बाद उनकी पैकेजिंग, भंडारण और विपणन के गुर भी सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसान अपने बागानों में इन तकनीकों का इस्तेमाल करने के साथ अन्य किसानों को भी जागरूक करेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में 808.79 करोड़ रुपये की लागत से सेब की अति सघन बागवानी योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब के बाग विकसित करने का लक्ष्य है। किसानों को इस योजना में 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

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शीत भंडारण इकाइयां की जा रहीं स्थापित

उन्होंने बताया कि सेब की तुड़ाई के बाद बेहतर प्रबंधन के लिए 144.55 करोड़ रुपये की लागत से शीत भंडारण और छंटाई-श्रेणीकरण इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसमें 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। वहीं, 80 करोड़ रुपये की लागत से 400 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक सेब पौधशालाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि भविष्य में किसानों को कीवी उत्पादन और मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन रोकने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर ज्योति कोटिया, संध्या थापा और मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. डीके तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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