Share Market : अमेरिका में चुनाव नतीजों के बीच भारतीय बाजार में छाई रौनक, सेंसेक्स 340 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,893 पार
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को मिला सहारा, डॉलर कमजोर होने से भारतीय करेंसी मजबूत, विदेशी फंड की खरीदारी से बाजार को सपोर्ट
बिजनेस डेस्क, 4 नवंबर 2026:
अमेरिका में चुनाव परिणाम के इंतजार के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई। शुरुआती गिरावट से उबरते हुए सेंसेक्स-निफ्टी ने बढ़त बना ली। सुबह 9:22 बजे सेंसेक्स 339.83 अंक चढ़कर 77,257.68 पर पहुंच गया। इसमें 0.44 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसी तरह निफ्टी 83.06 अंक बढ़कर 23,893.90 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। इसमें 0.35 फीसदी की बढ़त रही।
रुपये को भी मिला सहारा
शेयर बाजार के साथ भारतीय रुपये की शुरुआत भी मजबूती के साथ हुई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और विदेशी फंड की खरीदारी से रुपया शुरुआती कारोबार में 14 पैसे मजबूत होकर 94.61 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
अमेरिकी चुनाव के संकेतों पर निवेशकों की नजर
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के संकेतों के बीच भारतीय बाजार में खरीदारी बढ़ी। शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में आ गए। बाजार के ज्यादातर व्यापक सूचकांकों में भी तेजी रही।
एफएमसीजी शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल
सेक्टर के लिहाज से निफ्टी एफएमसीजी सबसे आगे रहा। इस सूचकांक में 1.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाले इंडिया वीआईएक्स में 2 फीसदी का उछाल आया। इससे कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव की आशंका भी बनी रही।
वैश्विक बाजारों में दिखी कमजोरी
भारतीय बाजार में तेजी के उलट एशियाई बाजारों में दबाव देखने को मिला। टोक्यो समय के मुताबिक दोपहर 12:26 बजे एसएंडपी 500 वायदा 1.1 फीसदी गिर गया। निक्केई 225 वायदा में 3.9 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि जापान का टॉपिक्स 2.5 फीसदी नीचे आ गया।
ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.7 फीसदी गिरा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.1 फीसदी नीचे रहा, जबकि शंघाई कंपोजिट में मामूली बदलाव हुआ। यूरो स्टॉक्स 50 वायदा भी 1.4 फीसदी टूट गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी चुनावी नतीजों का असर
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका असर मध्य पूर्व के तनाव, ऊर्जा की कीमतों, वैश्विक व्यापार नीतियों के साथ एआई डेटा सेंटर में होने वाले निवेश पर भी पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब चुनावी नतीजों के साथ वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है।






