Rajasthan

राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले, मरीजों में मिले नए वेरिएंट के लक्षण

जयपुर, 30 मई 2025

राजस्थान में एक बार फिर कोरोना के मामले अचानक बढ़ने लगे हैं साथ ही यहां कुछ मरीजों में कोरोना के नए वेरिएंट के लक्षण भी देखने को मिले। ताजा आकड़ों के मुताबिक बीते गुरूवार को राजस्थान में कोविड-19 के कम से कम 15 नए मामले सामने आए, जिनमें जयपुर में सबसे ज़्यादा नौ मामले सामने आए। जोधपुर में दो मामले सामने आए, जबकि उदयपुर में चार मामले सामने आए। इसके अलावा, राज्य में कोरोना वायरस के एक नए वैरिएंट की पुष्टि हुई है। पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) को भेजे गए चार मरीजों के नमूनों में एक्सएफजी और एलएफ.7.9 वैरिएंट के दो-दो मामले सामने आए।

वर्तमान में, ये दो वैरिएंट भारत के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में अधिक बार रिपोर्ट किए जा रहे हैं। इनके अलावा, JN.1 और NB.1.8.1 सीरीज के स्ट्रेन भी पाए जा रहे हैं।  एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि मौजूदा स्ट्रेन ज्यादा गंभीर नहीं लग रहे हैं।  उन्होंने सलाह दी, “घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, लोगों को सतर्क रहना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने पर विचार करना चाहिए।”

राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राजस्थान में इस वर्ष अब तक कुल 54 COVID-19 मामले सामने आए हैं, जबकि एक मौत भी दर्ज की गई है।  जिलेवार, जयपुर में 26 मामले सबसे अधिक हैं, इसके बाद जोधपुर और उदयपुर में आठ-आठ, डीडवाना में तीन, बीकानेर और अजमेर में दो-दो, तथा दौसा, बालोतरा, फलौदी, सवाई माधोपुर और एक अन्य स्थान पर एक-एक मामला सामने आया है।

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भारत के कई राज्यों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच चार नए वेरिएंट की पहचान की गई है: LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1। आईसीएमआर के निदेशक डॉ. राजीव बहल ने इसकी पुष्टि की, उन्होंने कहा कि इन वेरिएंट को दक्षिण और पश्चिम भारत में लिए गए नमूनों से अनुक्रमित किया गया था।

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नए स्ट्रेन के उभरने पर नज़र रखने के लिए पूरे देश में जीनोम सीक्वेंसिंग चल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इन वेरिएंट को चिंताजनक श्रेणी में नहीं रखा है, लेकिन चीन सहित अन्य एशियाई देशों में इनकी मौजूदगी के कारण इन्हें निगरानी में रखा है।  एनबी.1.8.1 वैरिएंट अपने स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन, ए435एस, वी445एच और टी478आई के लिए उल्लेखनीय है, जो इसे अधिक तेजी से फैलने और पिछले संक्रमणों से विकसित प्रतिरक्षा से बचने में सक्षम बनाता है।  वर्तमान में, JN.1 वैरिएंट भारत में सबसे अधिक प्रचलित है, जो 50 प्रतिशत से अधिक परीक्षण किए गए नमूनों में पाया गया है। इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और अन्य ओमिक्रॉन उप-वंश (20 प्रतिशत) हैं।

 

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