Uttarakhand

दून की ग्रामीण महिलाओं के हुनर का कमाल, स्वदेशी LED लड़ियों का मिला ऑर्डर, कमाएंगी लाखों

दीपावली पर चीनी झालरों को भी मिल रही चुनौती, मिलेट्स के कारोबार से कमाए 18 लाख रुपये, मोटे अनाज से तैयार स्वादिष्ट उत्पादों के गिफ्ट हैंपर बाजार में मचा रहे धूम

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 4 नवंबर 2026:

इस दीपावली उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की ग्रामीण महिलाओं ने हुनर, मेहनत और उद्यमशीलता की ऐसी रोशनी बिखेरी है, जो घरों को रोशन करने के साथ उनके जीवन में खुशहाली भी ला रही है। कहीं पहाड़ के मोटे अनाज (मिलेट्स) से तैयार स्वादिष्ट उत्पादों के गिफ्ट हैंपर बाजार में धूम मचा रहे हैं तो कहीं महिलाओं के हाथों से तैयार स्वदेशी एलईडी लड़ियां चीनी उत्पादों का विकल्प बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी दो महिला क्लस्टर की इस पहल ने दीपावली के कारोबार को महिला आत्मनिर्भरता की बड़ी मिसाल बना दिया है।

स्वाभिमान बेकरी यूनिट की सदस्य कल्पना बिष्ट के मुताबिक इस दीपावली अब तक दो हजार से अधिक गिफ्ट हैंपर बिक चुके हैं, जिनसे 18 लाख रुपये से ज्यादा की आय हुई है। करीब दो साल पहले ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के सहयोग से शुरू हुई इस यूनिट में गांव की आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला हुआ है।

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चीनी झालरों के बाजार में स्वदेशी चुनौती

रायपुर के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति महिला क्लस्टर की करीब 350 महिलाएं स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियां तैयार कर रही हैं। महिलाओं को कुल 1.30 लाख लड़ियां बनाने का ऑर्डर मिला है। इसमें से 1.05 लाख की आपूर्ति पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 25 हजार लड़ियों बन रही हैं। क्लस्टर अध्यक्ष ममता कोठियाल के अनुसार प्रत्येक महिला को 100 पैकेट तैयार करने पर करीब 700 रुपये की आमदनी हो रही है। इस काम से महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल रहा है और स्वदेशी उत्पादों को भी बाजार में जगह मिल रही है। यही नहीं चीनी झालरों को भी ये चुनौती दे रही हैं।

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दून की ग्रामीण महिलाओं के हुनर का कमाल, स्वदेशी LED लड़ियों का मिला ऑर्डर, कमाएंगी लाखों (2)

महिलाओं के लिए रोजगार के खुल रहे नए रास्ते

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टर की महिलाएं त्योहार के दौरान पूरी मेहनत से उत्पादन और आपूर्ति में जुटी हैं। मिलेट्स उत्पादों और स्वदेशी एलईडी लड़ियों की बढ़ती मांग ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रही है। यह पहल साबित कर रही है कि सही अवसर और प्रशिक्षण मिले तो गांव की महिलाएं भी बड़े बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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