Lucknow City

SIR पर बढ़ा सियासी संग्राम : लखनऊ में सोशलिस्ट पार्टी का प्रदर्शन, लगाए ये गंभीर आरोप

शहीद स्मारक पर मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय की अगुवाई में जुटे लोग, BLO मौतों पर भी उठाया सवाल, ट्रांसजेंडर और बिना दस्तावेज वाले लोगों को लेकर जताई चिंता

लखनऊ, 29 नवंबर 2025:

यूपी में वोटरलिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर राजनीतिक तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद शनिवार को सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने लखनऊ में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शहीद स्मारक पर प्रदर्शन का नेतृत्व मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एवं पार्टी के यूपी के प्रधान महासचिव संदीप पांडेय ने किया।

c5f92f67-bdbe-4f13-bda9-9e5fefb0af8f
Political Row Escalates Over SIR: Socialist Party Protests in Lucknow

उन्होंने आरोप लगाया है कि SIR को लेकर अनावश्यक जल्दबाजी की जा रही है। इसकी कोई स्पष्ट वजह सरकार या चुनाव आयोग सामने नहीं रख पा रहा है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि SIR को इतने कम समय में पूरा करने पर दबाव बनाया जा रहा है।

प्रदर्शन में विशेष तौर पर SIR प्रक्रिया के दौरान कई बीएलओ (BLO) की मौतों पर चिंता जताई गई। लोगों ने पूछा कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या सरकार या आयोग ने उनके परिवारों की कोई सुध ली है?

ये भी पढ़ें:

प्रदर्शनकारियों ने कई उदाहरण रखकर SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। लखनऊ मध्य विधानसभा के शिया कॉलेज मतदान केन्द्र के BLO हेमराज पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने मतदाता सैयद वहीद आलम का फॉर्म उनकी जानकारी के बिना ही भरकर जमा कर दिया। आलम का SIR फॉर्म उनके पास ही मौजूद है, जिससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Advertisement

वहीं, लखनऊ के अकबरनगर से विस्थापित और अब वसंत कुंज में बसे लोगों को भाग संख्या 339 के BLO निर्मल कुमार ने ये कहते हुए SIR फॉर्म देने से मना किया कि ऊपर से मना किया गया है। ऐसे में इन लोगों के पास केवल फॉर्म-6 भरकर अपने मतदाता पहचान को फिर से स्थापित करने का रास्ता रह जाता है, जिससे वे नए मतदाता के रूप में दर्ज हो जाएंगे। इससे उनके पुराने मतदाता रिकार्ड और नागरिकता की स्थिति पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है।

प्रदर्शन में यह भी सवाल उठाया गया कि ट्रांसजेंडर समुदाय या वे लोग जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं उन्हें नए SIR सिस्टम के तहत मतदाता सूची में कैसे शामिल किया जाएगा?

लगातार बढ़ते विरोधों के बीच SIR प्रक्रिया पर न सिर्फ राजनीतिक दल, बल्कि नागरिक संगठन और आम लोग भी सवाल उठा रहे हैं। पारदर्शिता, जल्दबाजी और मानव संसाधन पर पड़ रहे दबाव को लेकर विवाद और भी गहराता दिखाई दे रहा है।

ये भी पढ़ें  61 सालों बाद इस ऐतिहासिक उत्सव का गवाह बनेगा लखनऊ, जानिए इसमें क्या होगा खास

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link