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महाकुंभ से बजट तक : सनातन अर्थशास्त्र की ओर भारत की नई विकास यात्रा, UP बनेगा केंद्र

उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत, महाकुंभ, काशी और अयोध्या सर्किट से मिली सीख, बजट में दिखा नया विकास दृष्टिकोण

लखनऊ, 2 फरवरी 2026:

महाकुंभ से उभरे व्यापक आर्थिक प्रभावों ने भारत की विकास सोच को एक नया दृष्टिकोण दिया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में पहली बार भारत की पारंपरिक आर्थिक संरचना सनातन अर्थशास्त्र, उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था को नीति स्तर पर पहचान मिलती दिखाई दे रही है। यह बदलाव इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि भारत की विकास यात्रा अब केवल उद्योगों और महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत जड़ों से जुड़ते हुए आगे बढ़ेगी।

यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के अनुसार महाकुंभ ने यह सिद्ध कर दिया कि आस्था आधारित आयोजन केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते बल्कि वे बड़े आर्थिक उत्प्रेरक भी बन सकते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, काशी और अयोध्या के धार्मिक सर्किट में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, स्वास्थ्य सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के अवसरों ने मिलकर एक सशक्त आर्थिक इकोसिस्टम का निर्माण किया। इस अनुभव ने नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद की कि आस्था आधारित गतिविधियां अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर तक गति दे सकती हैं।

बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों को सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के रूप में विकसित करने की घोषणा को सीएम योगी की ‘विकसित टाउन’ की सोच का विस्तार माना जा रहा है। यह पहल उन कस्बों को पुनः सशक्त करेगी जो ऐतिहासिक रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था की सप्लाई चेन की रीढ़ रहे हैं। कस्बों के मजबूत होने से आसपास के गांवों के किसान, कारीगर और छोटे व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे। स्थानीय उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे और ये कस्बे बड़े शहरों के लिए फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में उभरेंगे।

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देश के सबसे अधिक कस्बे और शहरी क्षेत्र वाले यूपी इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बन सकता है। महाकुंभ के आर्थिक अनुभव के बाद बजट भाषण में पहली बार ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का प्रयोग किया गया है। ऐतिहासिक रूप से मंदिरों वाले नगर भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं। प्रयागराज-काशी-अयोध्या सर्किट ने यह स्पष्ट किया है कि मंदिर केंद्रित योजनाओं से हजारों कस्बों और छोटे शहरों का समग्र विकास संभव है।

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मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखनाथ, हस्तिनापुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे सनातन और बौद्ध परंपरा के प्रमुख केंद्र यूपी में स्थित हैं। साथ ही वाराणसी से पटना तक इनलैंड वाटरवे के विस्तार की घोषणा से लॉजिस्टिक्स सस्ती और प्रभावी होगी। गंगा, यमुना, घाघरा और राप्ती जैसी नदियों के विशाल नेटवर्क के कारण उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में सनातन अर्थशास्त्र और कस्बा आधारित विकास के जरिए भारत के नए विकास मॉडल का केंद्र बन सकता है।

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