UP की गोशालाएं बनेंगी कैटल फूड सिक्योरिटी हब : किसानों की आय व गोवंश पोषण को नई ताकत
मिशन फॉडर के जरिए 7,500 गोशालाओं और आसपास के क्षेत्रों को बनाया जाएगा हरा चारा उत्पादन का सशक्त केंद्र, हर गोशाला से जुड़ेंगे 50-100 किसान, लगाए जाएंगे सहजन के पौधे व नेपियर घास
लखनऊ, 9 फरवरी 2026:
यूपी में गोशालाएं अब सिर्फ गोवंश संरक्षण का केंद्र नहीं रहेंगी बल्कि उन्हें कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित करने की बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। प्रदेश सरकार मिशन फॉडर के जरिए 7,500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्रों को हरा चारा उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाएगी। इसका मकसद गोवंश को नियमित पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार मिशन फॉडर के तहत हर गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे चारा उत्पादन, विपणन और उचित मूल्य की संगठित श्रृंखला तैयार होगी। किसान चारा उगाकर आय अर्जित करेंगे और गोशालाओं को स्थानीय स्तर पर सतत आपूर्ति मिलेगी।
योजना के तहत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि पर मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण होगा। इसके साथ गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा और बरसीम को भी बढ़ावा दिया जाएगा। यूपी की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे उगाए जा सकते हैं। उनमें एकदलीय और बहुदलीय दोनों शामिल हैं। यही विविधता मिशन की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।
मोरिंगा 12-15 वर्षों तक लगातार हरा चारा देने के साथ प्राकृतिक छाया और जैविक फेंसिंग का काम करेगा, जबकि नेपियर घास उच्च उत्पादन क्षमता के कारण नियमित कटिंग से सतत आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। प्रतिदिन पर्याप्त हरा चारा मिलने से गोवंश का स्वास्थ्य सुधरेगा और दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। इससे गोशालाओं की संचालन लागत घटेगी और बाहरी निर्भरता कम होगी।
मिशन फॉडर के केंद्र में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-शहरी सहभागिता रखी गई है। चरणबद्ध तरीके से लागू होने वाली यह योजना स्थानीय रोजगार सृजन, हरित आवरण बढ़ाने और भूमि की उर्वरता सुधारने में भी अहम भूमिका निभाएगी।






