लखनऊ, 7 जून 2026:
यूपी में बेटियों के सशक्तीकरण और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में उभरकर सामने आई है। सीएम योगी की पहल पर वर्ष 2019 में शुरू की गई यह योजना आज लाखों परिवारों के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुकी है। योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश की 27,37,703 बालिकाओं को लाभान्वित किया जा चुका है। 674.15 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है।
महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहयोग प्रदान करना है जिससे उनकी शिक्षा और विकास में आर्थिक बाधाएं आड़े न आएं। योजना के तहत बालिकाओं को छह चरणों में कुल 25 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। जन्म के समय 5,000 रुपये, एक वर्ष तक पूर्ण टीकाकरण होने पर 2,000 रुपये, कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा-6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा-9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये तथा इंटरमीडिएट या हाईस्कूल उत्तीर्ण कर डिग्री अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। वहीं पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हुई है। भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनी है।
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी इन्दुमती ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना प्रदेश की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र बालिका योजना के लाभ से वंचित न रहे और समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
प्रदेश सरकार का मानना है कि महिलाओं और बालिकाओं का सर्वांगीण विकास सशक्त समाज की नींव है। यही कारण है कि कन्या सुमंगला योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न होकर समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। लाखों बेटियों को मिल रहा यह सहयोग उनके सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत गारंटी बन रहा है।






