लखनऊ, 10 मार्च 2026:
यूपी के गौतमबुद्धनगर (नोयडा) के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम पूरा हो गया है। मंगलवार को एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम योगी से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस उन्हें सौंपा। इस लाइसेंस के मिलने के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को परियोजना की मौजूदा प्रगति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी भी दी। अधिकारियों ने बताया कि एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के साथ ही एयरपोर्ट के संचालन से जुड़ी अंतिम नियामकीय प्रक्रियाएं तेज कर दी गई हैं।
फिलहाल एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी यूपी के लिए यह हवाई अड्डा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेवर में विकसित हो रहा यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का अनूठा समन्वय देखने को मिलेगा।
इस एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और यात्री टर्मिनल भवन तैयार किया गया है। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करीब 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक किया जाएगा, जबकि तीसरे और चौथे चरण के विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में करीब 1.38 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में बने टर्मिनल में 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है।
एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी बनाया जा रहा है। इसकी शुरुआती क्षमता करीब 2.5 लाख टन प्रतिवर्ष होगी जिसे आगे बढ़ाकर 15 लाख टन तक करने की योजना है। साथ ही डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव देंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी यूपी में निवेश, पर्यटन तथा रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।






