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लखनऊ के इन पुराने पेड़ों की तैयार होगी हेरिटेज कुंडली… 400 साल का बरगद भी आएगा रिकॉर्ड में!

LDA की अनोखी पहल : हर पेड़ की उम्र, प्रजाति और इतिहास होगा दर्ज, RCC चबूतरों से हो रही धीमी मौत पर भी फोकस

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026:

नवाबों और बागों के शहर लखनऊ में अब सदियों पुराने पेड़ों की पहचान और संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया जा रहा है। 100 साल या उससे अधिक उम्र पार कर चुके हेरिटेज पेड़ों की व्यापक मैपिंग की जाएगी। इस पहल के तहत पेड़ों की लोकेशन और प्रजाति दर्ज करने के साथ उनका इतिहास भी संकलित कर एक कैटलॉग तैयार किया जाएगा।

इस कैटलॉग को लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में प्रदर्शित किया जाएगा जहां लोग इन पेड़ों की तस्वीरों के साथ उनकी पूरी हेरिटेज कुंडली देख सकेंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

इस पहल के केंद्र में कैंट स्थित दिलकुशा गार्डेन का वह ऐतिहासिक बरगद का पेड़ भी है जिसे लेकर स्थानीय लोगों में मान्यता है कि इसकी उम्र लगभग 400 वर्ष है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार केशव वर्मा ने इस पेड़ का निरीक्षण किया और इसके संरक्षण पर जोर दिया।

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विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ों में एक उम्र के बाद ‘टाइलोसिस’ की प्रक्रिया शुरू होती है। इससे तना अंदर से खोखला होने लगता है। इस दौरान कैम्बियम में अवरोध पैदा होने से पेड़ के भीतर पोषक तत्वों का प्रवाह बाधित हो जाता है। ऐसी स्थिति में पेड़ अपनी बाहरी सतह से पोषण लेकर जीवित रहता है।

शहर में कई जगह पेड़ों के चारों ओर बनाए गए RCC चबूतरे उनके लिए घातक साबित हो रहे हैं। इससे पेड़ बाहरी सतह से पोषक तत्व नहीं ले पाते और धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। अधिकारियों ने इसे धीमी मौत करार देते हुए लोगों से जागरूक होने की अपील की है।

LDA ने म्यूजियम की क्यूरेशन टीम, उद्यान अनुभाग और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल (PMC) को इस दिशा में रिसर्च के निर्देश दिए हैं। इस काम में राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) का भी सहयोग लिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल शहर की हरित विरासत को संरक्षित करने के साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।

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