अयोध्या, 30 अप्रैल 2026:
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धर्म ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव और रामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती भी उतारी। कार्यक्रम के दौरान योगी ने कहा कि प्रभु राम, श्रीकृष्ण और भगवान शिव भारत को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीराम उत्तर को दक्षिण से जोड़ते हैं, श्रीकृष्ण पूरब को पश्चिम से और भगवान शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के माध्यम से पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोते हैं। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भी मानते थे कि राम, कृष्ण और शिवशंकर की उपस्थिति में भारत का कोई बाल बांका नहीं कर सकता लेकिन यह समझ सभी में नहीं होती।
मुख्यमंत्री ने तीखे शब्दों में कहा कि रामद्रोही और शिवद्रोहियों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं होगा। उन्होंने सनातन धर्म की एकता को देश की अखंडता का आधार बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि महापुरुषों को जातीयता के दायरे में न बांटें और समाज को विभाजित करने वालों से सावधान रहें।
त्रेतायुग की याद दिला रही नई अयोध्या
सीएम योगी ने कहा कि आज की अयोध्या त्रेतायुग की अनुभूति कराती है और यह डबल इंजन सरकार की ताकत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जब 140 करोड़ देशवासी एक स्वर में आगे बढ़ेंगे तो दुनिया की कोई शक्ति बाधा नहीं बन सकती।

मौसम बदला तो बोले… ईश्वरीय कृपा
ध्वजारोहण से पहले मौसम को लेकर बनी चिंता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तेज गर्मी और बारिश की आशंका थी लेकिन कार्यक्रम के समय मौसम सुहाना हो गया। इसे उन्होंने ईश्वरीय कृपा बताया और कहा कि प्रभु की शरण में शुद्ध नीयत से जाना जरूरी है।
500 वर्षों के संघर्ष का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए कहा कि 500 वर्षों तक गरीब, वंचित, वनवासी, उद्यमी सहित हर वर्ग ने एक ही संकल्प के साथ संघर्ष किया कि प्रभु राम का भव्य मंदिर बने। उन्होंने 1528 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तब से लेकर आज तक कोई दिन ऐसा नहीं गया जब सनातन धर्मावलंबियों ने रामजन्मभूमि के लिए सोचा न हो।
संघ और संतों की भूमिका का किया उल्लेख
सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा 1983 में आंदोलन का नेतृत्व संभालने के बाद यह चरम पर पहुंचा और अशोक सिंहल ने बिखरी ताकतों को एकजुट किया। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन ने जाति, भाषा और क्षेत्र की दीवारों को तोड़ा और आज भी देश के हर कोने में जय श्रीराम की गूंज सुनाई देती है। चाहे अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, नगालैंड, मिजोरम या जम्मू-कश्मीर हो।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ये बोले…
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से रामजन्मभूमि पर फैसला सुनाया तो देश का माहौल बेहद शांत और उल्लासपूर्ण था। उन्होंने आगे कहा कि 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन हुआ और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। 23 जनवरी को 5 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, 25 नवंबर को भगवा ध्वजारोहण हुआ और 19 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को राष्ट्रपति के कर-कमलों से श्रीराम यंत्र की स्थापना हुई।
‘जब हम बंटे थे, तब बाहरी शक्तियों ने लाभ उठाया’
उन्होंने कहा कि यह सभी घटनाएं वर्तमान पीढ़ी के लिए गर्व का विषय हैं और आने वाली पीढ़ियां इन्हें इतिहास के स्वर्णिम अध्याय के रूप में देखेंगी। सीएम योगी ने कहा कि जब हम बंटे थे, तब बाहरी शक्तियों ने लाभ उठाया। आज हम एकजुट हैं, इसलिए सुरक्षित हैं। उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों से एकता बनाए रखने का आह्वान किया।
ध्वजारोहण समारोह में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेदप्रकाश गुप्त, रामचंद्र यादव, अमित सिंह चौहान, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, डॉ. अनिल मिश्र सहित कई लोग मौजूद रहे।






