विकास गोंड़
वाराणसी, 5 मई 2026:
काशी विश्वनाथ धाम में इन दिनों ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ लोगों का ध्यान खींच रही है। करीब 700 किलो वजनी यह खास घड़ी मंदिर परिसर की भव्यता बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं को प्राचीन भारतीय समय गणना पद्धति से भी जोड़ रही है। घड़ी ज्योतिषीय गणना के साथ त्योहार ग्रहण की जानकारी देती है। यही नहीं इसका समय चक्र सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
काशी विश्वनाथ धाम को ये विशिष्ट घड़ी प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भेंट की गई जिसे हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में स्थापित किया गया था। यह घड़ी सामान्य 24 घंटे की प्रणाली से अलग काम करती है। इसमें समय की गणना वैदिक पंचांग के आधार पर होती है, जहां दिन की शुरुआत आधी रात नहीं बल्कि सूर्योदय से मानी जाती है और अगला सूर्योदय होने तक एक दिन पूरा होता है। इसमें पूरे दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है, हर मुहूर्त करीब 48 मिनट का होता है।

घड़ी की खास बात यह है कि यह सिर्फ समय नहीं बताती, बल्कि तिथि, नक्षत्र, चंद्रमा की स्थिति और अन्य ज्योतिषीय गणनाएं भी दिखाती है। इसके साथ ही इसमें स्थानीय माध्य समय, भारतीय मानक समय और ग्रीनविच समय भी एक साथ देखा जा सकता है। त्योहार, ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं की जानकारी भी इसमें मिलती है।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक इस पहल का मकसद वैदिक काल की समय गणना प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि आने वाले लोग भारतीय परंपरा और ज्ञान प्रणाली को बेहतर तरीके से समझ सकें। मंदिर से जुड़े न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि कई अध्ययनों में वैदिक समय गणना पर आधारित कुछ आकलन आधुनिक तरीकों से भी ज्यादा सटीक पाए गए हैं। इस घड़ी के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा की झलक भी मिल रही है।






