Uttar Pradesh

गोशालाओं से बनेगा ‘ग्रीन गोल्ड’… जानिए क्या है UP सरकार का 2100 करोड़ का मास्टरप्लान

प्रदेश के 7,500 गो आश्रय स्थल बनेंगे ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर सेंटर, महिलाओं-युवाओं को मिलेगा रोजगार, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया इंजन

लखनऊ, 13 मई 2026:

यूपी में गो संरक्षण अब केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती और रोजगार का बड़ा मॉडल बनता जा रहा है। योगी सरकार ने प्रदेश की करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों को ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य गोसंरक्षण को किसानों की आय, महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर गांवों से जोड़ना है।

प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी के अनुसार प्रदेश के गो आश्रय स्थलों में इस समय लगभग साढ़े बारह लाख गोवंश संरक्षित हैं। सरकार अब इन गोशालाओं को जैविक खाद और गो आधारित उत्पाद निर्माण के बड़े केंद्रों में बदलने जा रही है। गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार एक गाय से प्रतिदिन लगभग 10 किलोग्राम गोबर और 5 लीटर गोमूत्र प्राप्त होता है। इन्हीं संसाधनों को ग्रीन गोल्ड के रूप में इस्तेमाल कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। योगी सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके साथ 155 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। कुल 2100 करोड़ रुपये इस अभियान पर खर्च किए जाएंगे।

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी गो आश्रय स्थलों के संचालन से जोड़ा जाएगा। चयनित महिला समूहों को गोवंश की देखभाल, जैविक खाद निर्माण और उत्पाद प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे गांवों में महिलाओं की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

सरकार की मुख्यमंत्री सहभागिता योजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से अधिक गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। सरकार प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के खातों में भेज रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है।

प्रदेश सरकार का दावा है कि वर्ष 2017 के बाद अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई और व्यापक गोसंरक्षण अभियान के चलते उत्तर प्रदेश देश में गोसंरक्षण के सबसे बड़े और संगठित मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है।

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