लखनऊ, 31 मई 2026:
यूपी में आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं को तकनीक से जोड़कर योगी सरकार ने सेवा वितरण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित निगरानी और पंजीकरण प्रणाली के कारण अब योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पात्र महिलाओं और बच्चों तक पहुंच रहा है।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा राज्य पोषण मिशन की ओर से संचालित पोषण ट्रैकर प्रणाली ने प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था को आधुनिक और जवाबदेह बनाया है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप तकनीक का उपयोग कर पोषण सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से प्रदेश में 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि फेस रिकग्निशन तकनीक ने लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे फर्जी नामों और अपात्र व्यक्तियों की प्रविष्टियों पर प्रभावी रोक लगी है। इसके परिणामस्वरूप योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक पात्रों तक पहुंच रहा है। इससे सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ योजनाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ी है।
पोषण ट्रैकर के जरिए गर्भवती महिलाओं, माताओं और बच्चों का संपूर्ण रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो रहा है। स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सूचनाओं के डिजिटल संकलन से लाभार्थियों की नियमित निगरानी संभव हुई है। इसके साथ ही अधिकारियों को योजनाओं की समीक्षा और मूल्यांकन करने में भी सुविधा मिल रही है।
तकनीक आधारित इस व्यवस्था से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है। लाभार्थियों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध हो रही है। इसके साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ी है। प्रदेश में लागू यह डिजिटल मॉडल अब सुशासन और प्रभावी सेवा वितरण का उदाहरण बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है।






